भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। फरवरी 2026 में देश का कुल GST संग्रह सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो अर्थव्यवस्था में बढ़ती कारोबारी गतिविधियों और कर संग्रह व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 28 फरवरी तक कुल ग्रॉस GST राजस्व 20.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा सरकार के राजस्व ढांचे में स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत माना जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश का कुल घरेलू राजस्व 5.3 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि आयात से मिलने वाला राजस्व 17.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ 47,837 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं कुल रिफंड में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो सालाना आधार पर 10.2 प्रतिशत बढ़कर 22,595 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद शुद्ध GST कलेक्शन 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.9 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि नेट सेस राजस्व घटकर 5,063 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल फरवरी के 13,481 करोड़ रुपये से कम है।
भारत सरकार ने कारोबारी साल 2026 के लिए GST कलेक्शन में लगभग 11 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य तय किया है। सरकार का अनुमान है कि सेंट्रल GST और कंपेंसेशन सेस समेत कुल 11.78 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, डिजिटल ट्रांजैक्शन में वृद्धि और कर अनुपालन में सुधार का परिणाम है। सरकार की ओर से कर प्रणाली को सरल बनाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के प्रयासों का भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।
राज्यवार GST कलेक्शन की बात करें तो इसमें मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। औद्योगिक राज्यों में जहां बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला, वहीं कुछ छोटे और संसाधन आधारित राज्यों में गिरावट दर्ज की गई। 10,286 करोड़ रुपये के साथ महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा कर संग्रह किया, जबकि कर्नाटक और गुजरात भी प्रमुख योगदान देने वाले राज्यों में शामिल रहे। इन राज्यों में मजबूत औद्योगिक ढांचा और व्यापारिक गतिविधियों की अधिकता को GST संग्रह में बढ़ोतरी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
पोस्ट-सेटलमेंट SGST के आधार पर कई राज्यों में राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिनमें हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। वहीं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में GST राजस्व में गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों के प्रदर्शन में अंतर उनके औद्योगिक विकास, खपत स्तर और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करता है। कुल मिलाकर GST कलेक्शन में आई यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
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