सोना नहीं, गोल्ड ETF ने लगाई चमक: 10 लाख के बने 1 करोड़
निप्पॉन इंडिया गोल्ड BeES ने 2007 से 950% रिटर्न दिया, निवेशकों को लंबी अवधि में बड़ा फायदा
सोने के निवेशक इन दिनों गोल्ड ईटीएफ की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। निप्पॉन इंडिया गोल्ड BeES ने 2007 से अब तक 950% रिटर्न दिया है। यानी अगर 18 साल पहले कोई निवेशक इसमें 10 लाख रुपये लगाए होते, तो आज उनकी संपत्ति 1 करोड़ रुपये से अधिक हो गई होती। इस दौरान सोना और गोल्ड ईटीएफ दोनों ही ग्लोबल और भारतीय बाजारों में रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, क्योंकि निवेशक महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर मार्केट की अस्थिरता के बीच सुरक्षित विकल्प की तलाश में हैं।
भारत में सोने की कीमतें 1.22 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई हैं और चांदी की कीमत 1.5 लाख रुपये प्रति किलो से ऊपर चली गई है। वहीं, ग्लोबल मार्केट में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से अधिक पर ट्रेड कर रहा है। अमेरिकी बिलियनेयर रे डालियो ने भी सलाह दी है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का करीब 15% हिस्सा सोने में रखना चाहिए, क्योंकि यह अन्य एसेट्स के मुकाबले स्थिरता प्रदान करता है।
निप्पॉन इंडिया गोल्ड BeES में वर्तमान में निवेशकों का 24,000 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो है। पिछले एक साल में इसमें 56% से अधिक की ग्रोथ हुई है और 18 सालों में CAGR के हिसाब से 13.5% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह निवेशकों को डॉट-कॉम क्रैश, 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस और 2020 के कोविड शॉक जैसे कठिन समय में भी सुरक्षा प्रदान करता रहा है।
सोने की इस तेजी के पीछे डी-डॉलराइजेशन, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावना जैसी वैश्विक परिस्थितियां प्रमुख हैं। रूस और चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अपने डॉलर रिजर्व को कम कर सोने में निवेश बढ़ा रही हैं। इस साल अब तक गोल्ड ETFs में 2.18 बिलियन डॉलर का निवेश आया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को गोल्ड ईटीएफ में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना चाहिए। यदि कीमतों में मामूली गिरावट आए, तो इसे खरीदने का अवसर समझा जाना चाहिए। साथ ही सोने और चांदी में 50:50 के अनुपात में निवेश करना भी लाभकारी हो सकता है, क्योंकि दोनों की कीमतें स्थिर और आकर्षक प्रदर्शन कर रही हैं।
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