इज़राइल में डटे हैं 6,774 भारतीय कामगार, लेकिन भाषा की दीवार बनी 220 की वापसी की वजह
सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि 1 जुलाई 2025 तक 6,774 भारतीय कामगार इज़राइल में रोजगार के लिए पहुंच चुके हैं। ये सभी वहां एक द्विपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते के तहत गए थे, जिस पर नवंबर 2023 में हस्ताक्षर हुए थे। हालांकि इनमें से 220 कामगार इज़राइल में भाषा संबंधी दिक्कतों और कौशल असंतुलन की वजह से भारत लौट आए हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि इनमें से अधिकांश मजदूर निर्माण क्षेत्र में काम कर रहे हैं। कुल 6,730 भारतीय इस सेक्टर में हैं, जबकि 44 लोग देखभालकर्ता (caregivers) की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, निजी माध्यमों से करीब 6,400 लोग पहले से इज़राइल में निर्माण कार्य में लगे हैं, और लगभग 7,000 भारतीय नागरिक देखभालकर्ता के रूप में भेजे जाने की प्रक्रिया में हैं।
मंत्री ने बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इज़राइल में भारतीय दूतावास लगातार कामगारों के संपर्क में रहता है और किसी भी आपात स्थिति में उनकी मदद के लिए तत्पर रहता है। सरकार घायलों के इलाज और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए इज़राइली अधिकारियों से भी समन्वय करती है।
संसद में यह भी बताया गया कि इज़राइल-हमास संघर्ष के दौरान मार्च 2024 में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हुए थे। इनमें से दो को लेबनान से हुए हमले में चोट लगी थी और एक को गाज़ा क्षेत्र से इज़राइल पर हमले के दौरान।
भले ही इज़राइल में फिलहाल हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन भारत ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी कामगार कानूनी, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से वहां पहुंचें और काम करें। जिन लोगों को भाषा और तकनीकी वजहों से कठिनाइयां हुईं, उनके लिए वापसी का रास्ता भी खुला रखा गया है।
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