अफगानिस्तान में भूकंप से तबाही, 49 गांवों के 5,230 घर ढहे, लाखों प्रभावित
31 अगस्त 2025 को अफगानिस्तान में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने देश को गहरी तबाही की ओर धकेल दिया है। इस आपदा में अब तक 2,200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। करीब 5 लाख लोग भूकंप से प्रभावित हुए हैं, जिनमें आधी संख्या बच्चों की है। प्रभावितों में ऐसे हजारों लोग भी शामिल हैं जिन्हें हाल ही में पाकिस्तान और ईरान से डिपोर्ट किया गया था। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने इन लोगों के जीवन को और कठिन बना दिया है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से 49 गांवों में कुल 5,230 घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, जबकि 672 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 362 गांव ऐसे हैं जहां तक राहत टीम अभी तक पहुंच नहीं पाई है, क्योंकि वहां जाने वाली सड़कों पर भूस्खलन और दरारें आ चुकी हैं। इससे न सिर्फ नुकसान का आकलन करना मुश्किल हो गया है, बल्कि राहत सामग्री भी प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रही। कई स्थानों पर लोग भोजन, पानी और आश्रय के बिना खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्यालय की कोऑर्डिनेशन चीफ शैनन ओहारा ने बताया कि जलालाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर एक जगह पहुंचने में ही 6.5 घंटे लग गए। संकरी और टूटी-फूटी सड़कों के कारण राहत ट्रक और वाहन फंसे हुए हैं। लैंडस्लाइड की वजह से कई रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे मदद पहुंचाने में और देरी हो रही है। इन परिस्थितियों में हजारों लोग भूख और प्यास से जूझ रहे हैं। साफ पानी की कमी, शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव और खुले में रहने की मजबूरी ने स्वास्थ्य संकट को और बढ़ा दिया है।
गांवों में महिलाओं और बच्चों की हालत बेहद गंभीर है। ठंड बढ़ने के साथ ही बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। राहत टीमों का कहना है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग खुले में शौच कर रहे हैं, जिससे हैजा जैसी बीमारियों का फैलना तय है। अक्टूबर के अंत तक बर्फबारी शुरू हो जाएगी और अगर समय रहते टेंट, गर्म कपड़े और दवाइयां नहीं पहुंचीं, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर बारिश हुई तो अचानक बाढ़ का खतरा होगा और भूकंप के झटके दोबारा आने पर लैंडस्लाइड से हालात और बिगड़ सकते हैं।
UN ने इस संकट से निपटने के लिए इमरजेंसी फंड बनाने की अपील की है ताकि टेंट, भोजन, साफ पानी और दवाइयां तत्काल भेजी जा सकें। तालिबान प्रशासन ने राहत कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया है। साथ ही राहत टीमों में महिलाओं को भी शामिल किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझा और हल किया जा सके। इस समय अफगानिस्तान के लाखों लोगों के जीवन को बचाने के लिए वैश्विक सहयोग और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।
Share this content:
