कुत्तों के काटने से सिर्फ रैबीज नहीं, कई खतरनाक बीमारियों का होता है खतरा
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम्स में रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के पीछे मुख्य कारण है आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली गंभीर बीमारियां और सुरक्षा का खतरा। कुत्तों के काटने से केवल रैबीज ही नहीं बल्कि कई अन्य जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं, जिन्हें समझना और सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
रैबीज के अलावा और क्या खतरे हैं?
रैबीज कुत्ते के काटने से होने वाली सबसे खतरनाक बीमारी है, जिसका टीका न लगवाने पर जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। पिछले दिनों एक खिलाड़ी की भी मौत रैबीज के कारण हुई है। लेकिन इसके अलावा कुत्तों के काटने से कुछ अन्य संक्रमण और बीमारियां भी फैल सकती हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं:
पस (प्यूरुलेंट) संक्रमण — कुत्ते के काटने वाली जगह पर बैक्टीरिया प्रवेश कर सूजन, लालिमा और पस जमने का कारण बनता है। इसका नाम है Capnocytophaga canimorsus, जो कमजोर इम्यूनिटी वाले बुजुर्गों, डायबिटीज और कैंसर मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है।
सेप्सिस (Sepsis) — अगर कुत्ते के काटे हुए घाव को ठीक से साफ नहीं किया गया या समय पर इलाज नहीं हुआ, तो संक्रमण खून में फैलकर सेप्सिस का कारण बन सकता है। यह स्थिति शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है और जानलेवा साबित हो सकती है।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
कुत्ते के काटने को हल्के में न लें और तुरंत चोट वाली जगह को साफ पानी और साबुन से धोएं।
यदि चोट पर लालिमा, सूजन या पस दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
टिटनेस वैक्सीन की बूस्टर डोज़ लेना न भूलें।
डॉग-बाइट के बाद बुखार, कमजोरी या घाव के आसपास जलन महसूस हो तो तुरंत मेडिकल सलाह लें।
आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखें और उन्हें छेड़ने या खाना खिलाने से बचें।
आवारा कुत्तों का व्यवहार
पालतू कुत्तों को ट्रेनिंग और वैक्सीनेशन दिया जाता है, जबकि आवारा कुत्ते न तो प्रशिक्षित होते हैं और न ही वैक्सीनेटेड। इसलिए ये अधिक आक्रामक हो सकते हैं और इनके काटने से बीमारियों का खतरा भी ज्यादा रहता है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
निष्कर्ष
डॉग बाइट को ‘छोटा हादसा’ समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। खासकर सेप्सिस जैसी गंभीर स्थिति को समझना और समय रहते सावधानी बरतना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। इसलिए आवारा कुत्तों से बचाव, अपने घावों की साफ-सफाई और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
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