दिल्ली में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं। बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने उन्हें वापस लौटाने की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है और इसके लिए ब्रिटेन के दो नामी वकीलों टोबी कैडमैन और अनास्तास्या मेदवेस्काया को हायर किया गया है। दोनों वकील रविवार को ढाका पहुंच चुके हैं और माना जा रहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रत्यर्पण मामले को आगे बढ़ाएंगे।
शेख हसीना को ढाका स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने नरसंहार के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान करीब 1400 लोगों की हत्या करवाई। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद हसीना भारत पहुंचीं और तब से नई दिल्ली में रह रही हैं। बांग्लादेश सरकार अब तक भारत को प्रत्यर्पण के लिए तीन सरकारी पत्र भेज चुकी है, लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला। अब सरकार अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाने की तैयारी में है।
बांग्लादेश का दावा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 की प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना को वापस किया जाना चाहिए। वहीं बांग्लादेश सरकार का कहना है कि हसीना भारत में रहकर राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं, जो उनके लिए और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों के लिए चुनौती है। आने वाले दिनों में यूनुस सरकार और अंतरराष्ट्रीय वकीलों की कानूनी रणनीति साफ करेगी कि यह मामला कूटनीतिक तनाव में बदलता है या समाधान की दिशा में बढ़ता है।
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