दिल्ली में आयोजित एक सिंधी समुदाय कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मचा दी है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही आज सिंध पाकिस्तान की जमीन हो, लेकिन सभ्यता, इतिहास और संस्कृति के स्तर पर सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि भविष्य में सीमा बदल सकती है और सिंध एक बार फिर भारत से जुड़ सकता है।
उनके इस बयान पर पाकिस्तान ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए इसे “भारत की विस्तारवादी सोच” बताया, जबकि कई सिंधी नेताओं और भारतीय सिंधी समुदाय ने इस वक्तव्य का स्वागत किया। राजनाथ सिंह ने अपने दावे के समर्थन में ऋग्वेद, महाभारत, सिंधु घाटी सभ्यता, सिंधी भाषा और विभाजन के दौरान भारत आने वाले लाखों सिंधी हिंदुओं के इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंध भारत की प्राचीन पहचान, संस्कृति और भाषाई धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भारत नैतिक रूप से सिंधी समुदाय की सुरक्षा के लिए बाध्य है।
राजनाथ सिंह के इस बयान को राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान सिंधी वोटबैंक को साधने के साथ-साथ सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं पाकिस्तान इसे भारत की रणनीतिक संदेश नीति के रूप में देख रहा है, क्योंकि सिंध पाकिस्तान का बड़ा आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है। राजनाथ सिंह के शब्दों ने एक पुराने भू-राजनैतिक और सांस्कृतिक सवाल को दोबारा अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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