अपदस्थ प्रधानमंत्री का दावा—अमेरिका-पाकिस्तान की भूमिका, यूनुस सरकार पर उग्रवाद बढ़ाने का आरोप; भारत से चुनाव की वैधता पर हस्तक्षेप की अपील
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तख्तापलट के बाद लगातार जारी इंटरव्यू की श्रृंखला में बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अगस्त 2024 में जो हुआ, वह कोई संवैधानिक परिवर्तन नहीं बल्कि “बिना चुने हुए लोगों द्वारा सत्ता छीनने की सुनियोजित कार्रवाई” थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने न तो इस्तीफा दिया, न कोई पत्र राष्ट्रपति को भेजा — बल्कि उन्हें मजबूरन देश छोड़ना पड़ा क्योंकि उनकी जान को खतरा था। चार बार प्रधानमंत्री रह चुकीं हसीना इस समय दिल्ली में एक सुरक्षित स्थान पर हैं और खुलकर अंतरिम सरकार पर निशाना साध रही हैं।
शेख हसीना के अनुसार, देश में उनकी सत्ता गिरने के तुरंत बाद हिंसा अचानक बढ़ी और अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं को निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कोई आकस्मिक हिंसा नहीं, बल्कि एक “संगठित अभियान” था जिसे कट्टरपंथी ताकतें चला रही थीं और अंतरिम प्रशासन ने इसमें सीधे या परोक्ष रूप से सहयोग किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए काम किया, लेकिन वर्तमान शासन इन्हीं मूल सिद्धांतों को कमजोर कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि हिंसक घटनाओं पर चुप न रहें।
इंटरव्यू में हसीना ने पाकिस्तान और अमेरिका पर तख्तापलट में भूमिका निभाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2024 में शुरू हुआ छात्र आंदोलन लोकतांत्रिक सुधारों के नाम पर शुरू तो हुआ, लेकिन जल्द ही इसे उग्रवादी गुटों और राजनीतिक विरोधियों ने हाइजैक कर लिया। उनके अनुसार, आंदोलन की आड़ में अवामी लीग पर प्रतिबंध जैसी कार्रवाइयाँ की गईं, जो किसी जनविद्रोह का हिस्सा नहीं बल्कि सत्ता पर कब्जा जमाने की रणनीति थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अंतरिम सरकार वास्तव में जनता के समर्थन से बनी है, तो वह अब तक निष्पक्ष चुनाव कराकर जनता की राय क्यों नहीं जानती?
शेख हसीना ने भारत से भी बड़ा अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत, जो बांग्लादेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, उसे ऐसे किसी भी चुनाव को मान्यता नहीं देनी चाहिए जिसमें अवामी लीग को बाहर रखा जाए। हसीना का कहना है कि नया जुलाई चार्टर बांग्लादेश के इतिहास को बदलने की कोशिश है और उन सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है जिन्हें उनके पिता, शेख मुजीबुर रहमान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्थापित किया था। उनके अनुसार, देश आज चीन-अमेरिका तनाव और क्षेत्रीय रणनीतियों के बीच एक बेहद संवेदनशील स्थिति में है।
अंत में, उन्होंने कहा कि उनका देश से जाना “त्याग या पद छोड़ने का फैसला” नहीं बल्कि “हिंसा रोकने की मजबूरी” थी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि हालात नियंत्रण में नहीं हैं और उनके रहते हिंसा और बढ़ सकती है। उन्होंने दावा किया कि उनका लक्ष्य सिर्फ देश को और खून-खराबे से बचाना था। हसीना के इन बयानों ने बांग्लादेश की राजनीति और दक्षिण एशिया की स्थिरता पर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
Share this content:
