आज के तेज़ रफ्तार जीवन में कई लोग काम या मनोरंजन के चलते नींद को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन यह आदत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद न पूरी होना न केवल थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ाता है, बल्कि यह डिप्रेशन की शुरुआत का कारण भी बन सकता है। नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है और दिमाग दिनभर की थकान से मुक्त होता है। पर्याप्त नींद से मूड, फोकस और एनर्जी स्तर सही रहता है, जबकि लगातार कम नींद लेने से याददाश्त कमजोर होती है और सोचने-समझने की क्षमता घटती है।
नींद पूरी न होने पर दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे “फील-गुड” हॉर्मोन का स्तर घट जाता है, जिससे व्यक्ति उदासी, चिंता और नकारात्मक विचारों से घिरने लगता है। लंबे समय तक नींद की कमी डिप्रेशन, तनाव, सिरदर्द और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है। इसके अलावा, नींद न पूरी होने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और हार्ट डिजीज, मोटापा व डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए पर्याप्त नींद न केवल मानसिक शांति के लिए, बल्कि पूरे शरीर की सेहत के लिए भी जरूरी है।
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के डॉ. एल.एच. घोटेकर के मुताबिक, एडल्ट्स को रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लेना चाहिए, जबकि किशोरों को 8 से 10 घंटे और बच्चों को 9 से 11 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि हर दिन एक तय समय पर सोने और उठने की आदत डालें, सोने से पहले मोबाइल या टीवी से दूरी बनाएं, और कैफीन या भारी भोजन से परहेज करें। शांत माहौल और हल्की रोशनी में नींद गहरी होती है, जबकि ध्यान और हल्का योग नींद की गुणवत्ता को और बेहतर बनाते हैं। याद रखें — अच्छी नींद ही अच्छे मानसिक संतुलन और खुशहाल जीवन की कुंजी है।
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