डायबिटीज और दिल की बीमारियों पर गंभीर चर्चा, क्या आप भी हैं प्री-डायबिटीज के खतरे में?
फोर्टिस अस्पताल में आयोजित एक विशेष चर्चा में डायबिटीज और दिल की बीमारियों के बीच बढ़ते रिश्ते पर गहरी बात की गई। इस सत्र में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश वाधवानी और अपोलो हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. एस के वांगनू ने दिल और डायबिटीज के आपसी संबंधों के बारे में जानकारी दी। इस चर्चा में यह भी बताया गया कि कैसे प्री-डायबिटीज के बारे में सही समय पर जानकारी प्राप्त करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बचाव संभव है।
क्या है प्री-डायबिटीज? डॉ. वांगनू ने बताया कि डायबिटीज से पहले एक स्टेज होती है, जिसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है। यदि समय रहते इसका पता चल जाए और लाइफस्टाइल में बदलाव किया जाए तो डायबिटीज से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्री-डायबिटीज को लेकर जागरूकता जरूरी है क्योंकि यह 60 प्रतिशत मामलों में डायबिटीज में बदल सकती है। लेकिन, सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्री-डायबिटीज के लक्षण अक्सर सामने नहीं आते हैं, जिससे लोग इसे पहचान नहीं पाते हैं।
डायबिटीज के बढ़ते मामलों पर चिंता डॉ. वांगनू ने यह भी कहा कि देश में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्तमान में देश में 80 मिलियन से अधिक लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं और इनमें से 35 मिलियन लोग प्री-डायबिटीज स्टेज में हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि यह बीमारी चुपके-चुपके बढ़ती है और बिना किसी स्पष्ट लक्षण के लोगों को इसके बारे में पता भी नहीं चलता। उन्होंने बताया कि प्री-डायबिटीज का समय रहते इलाज कर लिया जाए तो भविष्य में डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन अगर यह बीमारी डायबिटीज में बदल जाती है तो इसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, इलाज नहीं।
प्री-डायबिटीज का पता कैसे लगाएं? प्री-डायबिटीज का पता लगाने के लिए कई तरीके हैं। डॉ. वांगनू ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का फास्टिंग शुगर लेवल 100 से ऊपर और 125 से नीचे है, और भोजन के बाद यह 140 से ऊपर और 200 से नीचे है, तो वह प्री-डायबिटीज की स्थिति में हो सकता है। इसके अलावा, HbA1c टेस्ट से भी इसका पता लगाया जा सकता है। यदि इस टेस्ट में शुगर लेवल 5.7 से 6.5 के बीच आता है तो यह प्री-डायबिटीज है। इस अवस्था में सही खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करके आप डायबिटीज के जोखिम को कम कर सकते हैं।
क्यों जरूरी है शुगर टेस्ट? डॉ. वांगनू ने यह भी कहा कि प्री-डायबिटीज का समय पर पता लगाना जरूरी है क्योंकि इसके बाद बीमारी पूरी तरह से डायबिटीज में बदल सकती है, जो कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि अगर आपको कोई लक्षण महसूस न हो, तो भी महीने में एक या दो बार ब्लड शुगर चेक कराना चाहिए। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति की उम्र 30 साल से अधिक हो, बीएमआई 25 से अधिक हो, या परिवार में किसी को डायबिटीज है, तो उन्हें शुगर लेवल की जांच जरूर करवानी चाहिए। अगर किसी को हाई बीपी, हार्ट डिजीज या मोटापा जैसी समस्याएं हैं, तो उन्हें तुरंत डायबिटीज के इलाज की शुरुआत करनी चाहिए।
क्या करें प्री-डायबिटीज से बचने के लिए? डॉ. वांगनू ने सुझाव दिया कि प्री-डायबिटीज के मामले में लाइफस्टाइल में बदलाव करने से इसे पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें सही खानपान, नियमित व्यायाम और तनाव से बचने की आदतें महत्वपूर्ण हैं। अगर समय रहते इसे पहचाना जाए और सही कदम उठाए जाएं तो डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बचाव संभव है।
इस चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्री-डायबिटीज के बारे में जागरूकता फैलाना और समय पर टेस्ट करवाना हर व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाता है तो यह भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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