May 8, 2026

Dev Uthani Ekadashi 2025: जानें कब रखा जाएगा देवउठनी एकादशी व्रत, पारण का समय और जरूरी नियम

देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पावन तिथि मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, जिससे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। 2025 में देवउठनी एकादशी का पर्व 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभ मुहूर्त प्रारंभ माना जाता है।

व्रत के नियमों के अनुसार, इस दिन व्यक्ति को सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक भोजन, चावल व लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है। व्रती को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए और पूरे घर व मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। दिनभर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर उन्हें तुलसी पत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

देवउठनी एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। इस बार व्रत का पारण 2 नवंबर को होगा। शास्त्रों के अनुसार, पारण का समय दोपहर 1 बजकर 11 मिनट से 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस समय के भीतर व्रत खोलना शुभ और फलदायी माना गया है। पारण के बाद व्रती को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करना चाहिए।

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि देवउठनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह दिन श्रद्धा, संयम और भक्ति से भरे उपवास का प्रतीक है, जो मानव जीवन को अध्यात्म से जोड़ता है।

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