डेंगू में इंटरनल ब्लीडिंग: जानें शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके
देश के कई हिस्सों में डेंगू तेजी से फैल रहा, एक्सपर्ट्स ने समय पर पहचान और इलाज की जरूरत बताई
भारत में मानसून और बारिश के मौसम में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं। यह वायरल संक्रमण एडीज मच्छर के काटने से फैलता है और खून की प्लेटलेट्स व इम्यून सिस्टम पर असर डालता है। आम लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, थकान और लाल चकत्तेदार दाने शामिल होते हैं। हालांकि, कभी-कभी डेंगू गंभीर रूप ले सकता है और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी खतरनाक स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
डेंगू में इंटरनल ब्लीडिंग तब होता है जब प्लेटलेट्स की संख्या लगभग 1,00,000/μL से नीचे गिर जाती है। इस वजह से रक्त का थक्का बनना मुश्किल हो जाता है और खून लिवर, किडनी या पेट के अन्य अंगों में फैल सकता है। इसे डेंगू हेमोरेजिक फीवर कहा जाता है। शुरुआती लक्षण नजरअंदाज करने पर ब्लड प्रेशर गिर सकता है और अंगों तक ऑक्सीजन पर्याप्त नहीं पहुँच पाती।
आरएमएल हॉस्पिटल के डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, इंटरनल ब्लीडिंग वाले मरीज में तेज और लगातार बुखार, असामान्य थकान, त्वचा पर लाल चकत्तेदार दाने, नाक या मसूड़ों से खून आना, पेशाब का गहरा रंग और उल्टी में खून जैसी शिकायतें दिखाई देती हैं। गंभीर मामलों में सिरदर्द, चक्कर, तेज धड़कन और ब्लड प्रेशर गिरना भी देखा जा सकता है।
बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा बेहद जरूरी है। पूरी बाजू के कपड़े पहनें, घर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें और खिड़कियों-दरवाजों पर जाली लगाएं। साथ ही, हेल्दी डाइट और हाइड्रेशन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
डेंगू के खतरनाक लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से हेमोरेजिक डेंगू से होने वाले गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
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