दिल्ली में AAP की हार के बाद बिखराव के संकेत? पंजाब के विधायकों संग केजरीवाल की अहम बैठक
दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज जैसे बड़े नेता भी इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके। अब पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल संगठन को मजबूत करने और संभावित बिखराव को रोकने में जुट गए हैं।
इसी कड़ी में आज मंगलवार को दिल्ली में पंजाब के विधायकों और मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा दावा कर रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के 30 विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं। उनके अलावा, कुछ अन्य नेताओं ने भी AAP में टूट की आशंका जताई है।
बैठक का असली मकसद क्या?
AAP सांसद मालविंदर सिंह कांग ने बैठक को पार्टी की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि इसका उद्देश्य भविष्य की रणनीति पर चर्चा और संगठनात्मक फीडबैक लेना है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे पंजाब में पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। इस बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब के सभी AAP विधायक केजरीवाल से मुलाकात करेंगे।
दिल्ली में झटका, अब सिर्फ पंजाब में सत्ता
दिल्ली चुनाव में AAP का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। पार्टी को 70 में से केवल 22 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज कर 27 साल बाद राजधानी की सत्ता में वापसी की। इस हार के साथ AAP के पास अब सिर्फ पंजाब में सरकार बची है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 117 में से 92 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी।
AAP में फूट के संकेत?
दिल्ली की हार के बाद पंजाब कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि वह लंबे समय से AAP के विधायकों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोगों ने कट्टर ईमानदार पार्टी का असली चेहरा देख लिया है। केजरीवाल और भगवंत मान ने बड़े-बड़े वादे कर वोट हासिल किए, लेकिन अब सच्चाई सामने आ रही है। यह AAP के अंत की शुरुआत है।”
कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि अरविंद केजरीवाल जल्द ही पंजाब की राजनीति में सीधा दखल दे सकते हैं। वहीं, बीजेपी नेता सुभाष शर्मा ने दावा किया कि केजरीवाल खुद पंजाब के मुख्यमंत्री बनने की योजना बना सकते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी इस राजनीतिक संकट से निकल पाएगी या फिर दिल्ली की हार के बाद पार्टी में बिखराव की शुरुआत हो चुकी है?
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