पटपड़गंज में बदल सकता है सत्ता का गणित! बीजेपी-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर, ‘आप’ की राह मुश्किल?
नई दिल्ली: दिल्ली की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में से एक पटपड़गंज इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबले का गवाह बन सकती है। इस सीट से पिछले तीन बार लगातार आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार वे जंगपुरा से चुनावी मैदान में हैं। उनकी गैरमौजूदगी में ‘आप’ के अवध ओझा, बीजेपी के रवींद्र सिंह नेगी और कांग्रेस के अनिल कुमार के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिल रही है।
पटपड़गंज: दिल्ली की सियासत का अहम केंद्र
पटपड़गंज विधानसभा सीट दिल्ली की राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। यह सीट कई बार सत्ता परिवर्तन का गवाह बन चुकी है। पटपड़गंज की अहमियत को समझने के लिए हमें दिल्ली विधानसभा के इतिहास पर एक नजर डालनी होगी।
कैसे मिली दिल्ली को विधानसभा?
दिल्ली को पहली बार 1952 में पार्ट-सी राज्य के रूप में विधानसभा मिली, लेकिन 1956 में इसे भंग कर दिया गया। इसके बाद, 1966 में दिल्ली को महानगर परिषद दी गई, लेकिन इसमें कई प्रशासनिक कमियां थीं। 1991 में संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम पारित हुआ, जिसने दिल्ली में एक विधानसभा की व्यवस्था की। हालांकि, पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि से जुड़े मामलों में विधानसभा को कोई अधिकार नहीं दिया गया।
पटपड़गंज विधानसभा का चुनावी इतिहास
1993: पहली बार बीजेपी की जीत
पटपड़गंज सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 1993 में हुआ, जब यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट थी। उस चुनाव में बीजेपी के ज्ञान चंद ने 17,020 वोटों के साथ जीत दर्ज की, जबकि जनता दल के अमरीश सिंह गौतम 14,873 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
1998: कांग्रेस ने पलटा खेल
1998 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई। अमरीश सिंह गौतम, जो 1993 में जनता दल के उम्मीदवार थे, कांग्रेस में शामिल होकर 33,351 वोटों से विजयी हुए। इस बार बीजेपी के गंगा राम पीपल को 17,030 वोट मिले, और वे दूसरे स्थान पर रहे।
अब क्या होगा? पटपड़गंज में किसकी होगी जीत?
इस बार पटपड़गंज में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। सवाल ये है कि क्या मनीष सिसोदिया की गैरमौजूदगी में ‘आप’ अपनी जीत की हैट्रिक बरकरार रख पाएगी, या फिर बीजेपी और कांग्रेस में से कोई नया विजेता उभरेगा? पटपड़गंज की जनता क्या फैसला करेगी, इसका सस्पेंस कुछ ही घंटों में खत्म होने वाला है!
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