दिल्ली में बीजेपी की सत्ता वापसी की उम्मीद, क्या पार्टी उन 11 सीटों पर भी जीत पाएगी जहां कभी नहीं मिली थी सफलता?
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी है और एग्जिट पोल में पार्टी की सत्ता में वापसी की संभावना जताई जा रही है। पार्टी ने इस बार उन 11 सीटों को जीतने के लिए भी रणनीति बनाई है, जहां पिछले 27 सालों में कभी बीजेपी को जीत का स्वाद नहीं मिला। क्या बीजेपी इन सीटों पर ‘कमल’ खिला पाएगी या फिर इन सीटों पर उसकी उम्मीदें नाकाम हो जाएंगी, यह बड़ा सवाल है।
दिल्ली में विधानसभा 1991 से बहाल हुई थी और अब तक कुल सात विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। बीजेपी ने सिर्फ एक बार 1993 में दिल्ली की सत्ता पर काबिज़ी पाई, लेकिन दिल्ली की 11 सीटें ऐसी हैं, जिन पर बीजेपी कभी भी जीतने में सफल नहीं हो पाई। इनमें मुस्लिम और दलित बहुल सीटें शामिल हैं, जो बीजेपी के लिए हमेशा चुनौती रही हैं। इस बार बीजेपी ने इन सीटों को जीतने के लिए एक सीक्रेट प्लान तैयार किया है, ताकि दिल्ली की सियासत में अपनी पकड़ मजबूत कर सके।
बीजेपी की कोशिशें क्या रंग लाती हैं, इस बार 11 सीटों पर सटीक ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें कोंडली, अंबेडकर नगर, मंगोलपुरी, सुल्तानपुर माजरा, ओखला, मटिया महल, सीलमपुर, बल्लीमारान, जंगपुरा और विकासपुरी सीटें शामिल हैं। खास बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन सीटों पर पिछड़ी रही थी, बावजूद इसके पार्टी ने इन क्षेत्रों में अपनी रणनीति को दुरुस्त किया और अब जीत के लिए पूरी ताकत झोंकी है।
दिल्ली के दलित और मुस्लिम वोट बैंक बीजेपी के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। 2013 के बाद से दलित सुरक्षित सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन फीका रहा है, वहीं मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी पार्टी का सियासी असर कम है। बीजेपी ने इस बार इन वोट बैंक को साधने के लिए कई नई रणनीतियां अपनाई हैं। पार्टी ने दलित वोटों के लिए अपने दलित नेताओं को मैदान में उतारा और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हिंदू प्रत्याशी उतारकर मुस्लिम बनाम मुस्लिम की लड़ाई का रणनीतिक इस्तेमाल किया।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की यह नई रणनीति इन सीटों पर काम करती है या नहीं। क्या पार्टी उन 11 सीटों पर अपना जलवा दिखाने में सफल होती है, जहां कभी नहीं जीत सकी, और क्या दिल्ली की राजनीति में बीजेपी की वापसी का सपना सच होगा?
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