दिल्ली में मंदिरों पर बुलडोजर कार्रवाई स्थगित, भारी विरोध के बाद मिली राहत
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार रात को एक बड़ी कार्रवाई होने वाली थी, जब दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा जारी नोटिस के बाद मयूर विहार-2 के संजय झील पार्क में स्थित तीन मंदिरों – कालीबाड़ी मंदिर, अमरनाथ मंदिर और बदरीनाथ मंदिर को ढहाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, इन मंदिरों के आसपास के लोग और स्थानीय समुदायों का भारी विरोध देखते हुए, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हस्तक्षेप से इस कार्रवाई को फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया। क्या यह निर्णय अस्थाई था या भविष्य में फिर से इसे लागू किया जाएगा?
DDA का नोटिस और मंदिरों पर कार्रवाई का विवाद
दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) के हॉटिकल्चर विभाग द्वारा जारी नोटिस में इन मंदिरों को ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में बने होने के कारण हटाने की चेतावनी दी गई थी। नोटिस में यह भी कहा गया था कि अगर मंदिरों को स्वेच्छा से नहीं हटाया गया, तो प्रशासन इसे खुद से हटा देगा। मंदिरों के आसपास रहने वाले स्थानीय लोग इस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे, क्योंकि इन मंदिरों की स्थापना 40 साल पहले हुई थी और वे सभी रजिस्टर्ड हैं। इस विरोध के बाद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के राज्यपाल से बात की और फिर DDA अधिकारियों से बातचीत करके मंदिरों को ढहाने की कार्रवाई को रोकने में सफलता पाई।
स्थानीय समुदायों का विरोध और पुजारियों की नाराजगी
मंदिरों के पुजारियों ने इस अचानक किए गए नोटिस को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कालीबाड़ी मंदिर के पुजारी ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से यहां पूजा कर रहे थे और उन्हें कभी भी कोई समस्या नहीं आई। अचानक से बिना किसी सूचना के नोटिस चिपका दिया गया। वहीं, अमरनाथ मंदिर के पुजारी ने कहा कि यह मंदिर कश्मीर से आए कश्मीरी पंडितों ने मिलकर बनाया था और यह मंदिर भी काफी पुराना है। उन्हें भी अचानक नोटिस जारी किए जाने पर आश्चर्य हुआ। तीसरे मंदिर, बदरीनाथ मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां भी कई सालों से पूजा होती आई थी, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के नोटिस चिपका दिया गया।
क्या यह अस्थाई समाधान है?
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंदिरों पर बुलडोजर की कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करना एक अस्थाई समाधान हो सकता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हस्तक्षेप और राजनीतिक दबाव ने प्रशासन को पीछे हटने पर मजबूर किया है। हालांकि, मंदिरों के आसपास के लोग और धार्मिक समुदाय अब भी इस विषय पर सतर्क हैं और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की योजना बना रहे हैं।
इस घटना ने दिल्ली सरकार, DDA और स्थानीय प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धार्मिक स्थलों को अचानक से खतरे में डालने के बजाय पहले स्थानीय समुदायों और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की जानी चाहिए थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली के मंदिरों पर यह अस्थायी राहत दी गई है, या भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई फिर से की जा सकती है।
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