May 6, 2026

दिल्ली: 16 वर्षीय छात्र ने मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में टीचरों पर लगाया परेशान करने का आरोप

मानसिक तनाव से जूझ रहा था छात्र, लिखा—“स्कूल ने मेरी बात नहीं सुनी, मौत के बाद अंगदान करना चाहता हूं”

राजधानी दिल्ली में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 16 वर्षीय छात्र ने आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार दोपहर पश्चिमी दिल्ली स्थित राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन पर हुई। छात्र ने सामने आती मेट्रो ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी। मौके पर मौजूद लोगों की मदद से उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले ने पूरे शहर में सवाल खड़ा कर दिया है—क्या स्कूल में छात्र मानसिक प्रताड़ना का शिकार था?

छात्र के स्कूल बैग से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इस नोट में छात्र ने अपने स्कूल के कुछ शिक्षकों का नाम लिखते हुए आरोप लगाया कि वह मानसिक तनाव में था और टीचर उसे लगातार परेशान करते थे। नोट में उसने यह भी लिखा कि उसके माता-पिता ने कई बार स्कूल प्रबंधन से उसकी समस्याओं को लेकर बात की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हैरान करने वाली बात यह है कि छात्र ने अपने पत्र में मौत के बाद अंगदान करने की इच्छा भी जताई।

पुलिस के मुताबिक, छात्र ड्रामा क्लब के लिए निकलने की बात कहकर घर से गया था। दोपहर 2:34 बजे वह मेट्रो प्लेटफॉर्म पर आया और तेज गति से आ रही ट्रेन के सामने छलांग लगा दी। घटना के बाद मेट्रो स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि किसी को अंदाजा नहीं था कि छात्र ऐसा कदम उठाएगा, क्योंकि वह सामान्य तरीके से प्लेटफॉर्म पर खड़ा दिखाई दे रहा था।

छात्र के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से स्कूल में हो रहे व्यवहार से बेहद परेशान था। पिता के मुताबिक, परिवार ने कई बार इस मामले को स्कूल प्रशासन तक पहुंचाया, लेकिन आरोप है कि किसी ने बात को गंभीरता से नहीं लिया। घटना के दिन पिता कोल्हापुर में थे, जहां उनकी पत्नी का ऑपरेशन होना था। इसी दौरान उन्हें फोन पर बेटे की मौत की सूचना मिली।

फिलहाल दिल्ली पुलिस ने छात्र का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जांच शुरू कर दी है। जिन शिक्षकों के नाम सुसाइड नोट में लिखे गए हैं, उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस छात्र के दोस्तों, परिवार और स्कूल प्रशासन से भी बयान दर्ज करने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्र पर किस तरह का मानसिक दबाव था जिसने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है—क्या स्कूल स्टूडेंट्स की मानसिक स्थिति को समझने में असफल हो रहे हैं? और क्या बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना के मामलों पर समय रहते मजबूत कार्रवाई की जरूरत है?

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