देहरादून: ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 70 साल की महिला से 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी
देहरादून में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने 70 साल की बुजुर्ग महिला से करीब 3.09 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर महिला को वीडियो कॉल के जरिए धमकाया और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी का भय दिखाया। डर और दबाव के माहौल में महिला को कथित जांच के नाम पर लगातार निर्देश दिए गए और उनसे बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली गई। इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए तरीकों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता को पिछले साल 1 सितंबर को एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल प्राप्त हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि महिला का मोबाइल नंबर 68 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। आरोपी ने महिला को तुरंत गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इतना ही नहीं, ठगों ने उन्हें सख्त निर्देश दिया कि इस मामले की जानकारी किसी को न दें, अन्यथा उनके बच्चों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस धमकी से महिला मानसिक रूप से भयभीत हो गईं और पूरी तरह से ठगों के झांसे में आ गईं।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से महिला को लंबे समय तक अपने प्रभाव में रखा। उन्होंने महिला से उनकी बैंक एफडी तुड़वाई, शेयर बिकवाए और यहां तक कि गहने गिरवी रखवाकर रकम जुटाने को कहा। महिला से बार-बार अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए, जिससे कुल रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। ठगों ने पूरी प्रक्रिया को जांच की औपचारिक कार्रवाई बताते हुए महिला को लगातार निगरानी में होने का अहसास कराया, जिससे वह किसी से संपर्क करने या शक जताने की स्थिति में नहीं रहीं।
काफी समय बाद जब महिला को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल लेन-देन की जानकारी खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग आम लोगों को डराने और मानसिक दबाव बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं, इसलिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या संदेश के जरिए गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी मिलने पर घबराएं नहीं और तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए इस प्रकार पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देती। इस तरह के मामलों से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी उपाय मानी जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की साइबर ठगी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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