दहेज प्रताड़ना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है: निक्की हत्याकांड में उजागर हुए चौंकाने वाले तथ्य
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में हुए निक्की हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 22 अगस्त को निक्की को उसके ही पति विपिन भाटी और सास-ससुर ने तेजाब डालकर जिंदा जला दिया। घटना की वजह थी दहेज की लगातार बढ़ती मांग और परिवार पर आर्थिक दबाव। निक्की और उसकी बड़ी बहन कंचन दोनों ही अपने ससुराल में प्रताड़ित हो रही थीं, बावजूद इसके परिवार ने दामाद की मांगें पूरी करने की कोशिश की। इस घिनौने अपराध ने एक बार फिर समाज और सरकार के सामने महिलाओं की सुरक्षा और दहेज प्रथा के खतरों को उजागर कर दिया।
निक्की के पिता भिखारी सिंह ने बताया कि दिसंबर 2016 में दोनों बेटियों की शादी एक ही घर में हुई थी। शादी के समय उन्होंने दामाद की हर मांग पूरी की, लेकिन कुछ ही समय बाद ससुराल वाले और अधिक पैसों की मांग करने लगे। भिखारी सिंह ने बताया कि विपिन शराब पीकर निक्की को पीटता था और उसके पैसों को अपने पास रख लेता था। निक्की महीने का लगभग एक लाख रुपया कमाती थी, जिसे विपिन अपने खर्चों में इस्तेमाल करता और बाद में ब्यूटी पार्लर को भी बंद करवा दिया।
भिखारी सिंह ने बताया कि उनकी दोनों बेटियों के साथ लगातार मारपीट होती थी। कंचन जब अपने देवर के गलत हरकतों का विरोध करती थी, तब उसका पति रोहित भी मारपीट में शामिल होता था। सास दयावती और ससुर भी रोज नई-नई डिमांड करके बेटियों को प्रताड़ित करते थे। इस प्रताड़ना के बीच परिवार ने कई बार पंचायतों के जरिए समाधान की कोशिश की, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला।
निक्की की बहन कंचन ने बताया कि 21 अगस्त को विपिन और सास ने निक्की को पीटा और जब वह बेहोश हुई, तब उस पर केमिकल डालकर आग लगा दी। निक्की का बेटा इस पूरी घटना का गवाह था और उसने अपनी आंखों के सामने अपनी मां को जलते देखा। यह घटना दिखाती है कि दहेज की लालसा और महिलाओं के प्रति हिंसा किस कदर बढ़ रही है और कितनी निर्दयी हो चुकी है।
सरकारी आंकड़े भी इस भयावह सच को प्रमाणित करते हैं। पिछले 22 साल में दहेज के कारण 1.8 लाख महिलाओं की मौत हो चुकी है। अकेले यूपी में दहेज के कारण 11,874 महिलाओं की जान गई। बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान भी इस मामले में शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। 2024 में महिलाओं के खिलाफ कुल 25,743 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 17 प्रतिशत दहेज उत्पीड़न के मामले थे। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि दहेज प्रताड़ना दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
निक्की हत्याकांड ने सरकार और समाज दोनों के सामने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महिलाएं अब सुरक्षित हैं? क्या उनके हक और सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानून और कड़ाई से लागू नीतियों की आवश्यकता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो हर दिन 20 महिलाओं की जान दहेज के लिए खतरे में रहेगी।
निक्की हत्याकांड की जांच में अब तक पति विपिन और सास दयावती को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जेठ रोहित और ससुर अभी भी फरार हैं। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कानून होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासन को मिलकर महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना होगा। देश और सरकार को यह सोचने पर मजबूर होना चाहिए कि ऐसे दरिंदों को रोकने के लिए अब और अधिक ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
यह दर्दनाक मामला समाज को चेतावनी दे रहा है कि दहेज प्रताड़ना और महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल परिवार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे रोकने के लिए हर नागरिक, प्रशासन और सरकार को मिलकर काम करना होगा। निक्की और जैसी अन्य महिलाओं की जान बर्बाद होने से बचाने के लिए सख्त और समयबद्ध कार्रवाई अब अनिवार्य है।
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