निवेशकों में घबराहट, इथेरियम-सोलाना समेत सभी कॉइनों में भारी दबाव
पिछले एक महीने से वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। बिटकॉइन, इथेरियम और अन्य प्रमुख डिजिटल एसेट्स की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। अक्टूबर 2025 की तुलना में क्रिप्टो मार्केट का कुल मूल्य लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर तक गिर गया है। भारतीय मुद्रा में यह घाटा करीब 100 लाख करोड़ रुपये बैठता है। यह अब तक क्रिप्टो बाजार में दर्ज सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
अक्टूबर में ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट कैप जहां 4.28 ट्रिलियन डॉलर था, वहीं अब यह घटकर करीब 2.95 ट्रिलियन डॉलर पर आ चुका है। बिटकॉइन, जो अभी भी क्रिप्टो बाजार का लगभग 58% हिस्सा अपने पास रखता है, सबसे ज्यादा गिरावट का सामना कर रहा है। 7 अक्टूबर 2025 को बिटकॉइन की कीमत अपने ऑल-टाइम हाई 1.10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह गिरकर लगभग 76 लाख रुपये पर पहुंच गई है। यानी सिर्फ एक महीने में लगभग 34 लाख रुपये यानी 30% से अधिक की गिरावट।
सिर्फ बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि इथेरियम और सोलाना जैसी बड़ी डिजिटल करेंसी भी लगातार नीचे जा रही हैं। उदाहरण के लिए, इथेरियम की कीमत 4.15 लाख रुपये से गिरकर सिर्फ 2.48 लाख रुपये रह गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई आर्थिक और तकनीकी कारण जुड़े हुए हैं, जिनकी वजह से निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।
क्रिप्टो मार्केट के गिरने की सबसे बड़ी वजहों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर असमंजस शामिल है। ब्याज दर बढ़ने की संभावना के चलते निवेशक क्रिप्टो जैसी हाई-रिस्क एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जा रहे हैं। इसके अलावा मार्जिन ट्रेडिंग की मजबूरी के कारण कई निवेशकों की क्रिप्टो होल्डिंग्स जबरन एक्सचेंज द्वारा बेची जा रही हैं, जिससे गिरावट और तेज हो रही है।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब बिटकॉइन के बड़े और पुराने निवेशकों में से एक ओवेन गुंडेन ने पिछले कुछ हफ्तों में अपने 11,000 बिटकॉइन बेच डाले। इन बिटकॉइनों की वैल्यू लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये थी। इतनी बड़ी सेलिंग ने बाजार पर मानसिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर भारी दबाव डाला।
बिटकॉइन को डिजिटल दुनिया का “डिजिटल गोल्ड” भी कहा जाता है। यह एक डिसेंट्रलाइज्ड क्रिप्टोकरेंसी है जिसे कोई सरकार या बैंक नियंत्रित नहीं करता। यह किसी नोट या सिक्के की जगह एक डिजिटल कोड होता है और डिजिटल वॉलेट के जरिए दुनिया में कहीं भी तुरंत भेजा जा सकता है। कुल मिलाकर सिर्फ 21 मिलियन बिटकॉइन ही बनाए जाएंगे, इसलिए इसकी मांग इसके भविष्य मूल्य को प्रभावित करती है।
फ़िलहाल क्रिप्टो मार्केट में अस्थिरता जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में क्रिप्टो बाजार में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि बिना सोचे-समझे फैसले न लें और जोखिम को ध्यान में रखते हुए सावधानी से निवेश करें।
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