डरते-डरते डीएम के पास पहुंचे मुस्लिम बुजुर्ग, पीलीभीत में इंसानियत की मिसाल बने जिलाधिकारी
पीलीभीत कलेक्ट्रेट में रोज़ की तरह जनसुनवाई चल रही थी, जहां जिलेभर से लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर आए थे। इन्हीं में एक मुस्लिम बुजुर्ग भी शामिल थे, जो घबराते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार के सामने पहुंचे। उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा—”साहब, मैं बहुत बीमार हूं…”। उनकी हालत और शब्दों ने वहां मौजूद सभी का ध्यान खींच लिया।
जनसुनवाई के दौरान अक्सर देखा जाता है कि कई अधिकारी शिकायतों के बीच चिढ़ जाते हैं या रौबीले अंदाज़ में आवेदकों को टाल देते हैं, लेकिन इस बार नज़ारा बिल्कुल अलग था। डीएम ने बुजुर्ग की बात बड़े ध्यान से सुनी और उनके स्वास्थ्य की गंभीरता को तुरंत समझ लिया। बिना देर किए उन्होंने मदद के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए, ताकि बुजुर्ग को तुरंत आवश्यक चिकित्सा और सहयोग मिल सके।
जिलाधिकारी के इस व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों के दिल को छू लिया। भीड़ में चर्चा होने लगी कि अधिकारियों में इस तरह की संवेदनशीलता कम देखने को मिलती है, खासकर जब रोज़ाना बड़ी संख्या में शिकायतें सुननी पड़ती हैं। लेकिन पीलीभीत डीएम ने दिखा दिया कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी इंसानियत सबसे ऊपर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे उदाहरण जनता के विश्वास को और मजबूत करते हैं। यह घटना न सिर्फ पीलीभीत के प्रशासन की सकारात्मक छवि पेश करती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई से प्रशासन जनता के दिल में जगह बना सकता है।
डीएम ज्ञानेंद्र कुमार के इस कदम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि किसी भी पद का असली सम्मान तभी है, जब वह ज़रूरतमंद की मदद और दुख को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाए।
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