April 17, 2026

समान नागरिक संहिता लागू करने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऐतिहासिक सम्मान, संतों का मिला आशीर्वाद

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘समानता के साथ समरसता’ कार्यक्रम में भाग लिया, जो प्रयागराज के आचार्य शिविर, सेक्टर-09, गंगेश्वर मार्ग में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी का स्वागत संतों द्वारा सम्मानित किया गया, जिन्होंने उन्हें पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया। यह सम्मान उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए उनके प्रयासों को मान्यता देने के रूप में था। संतों के इस अभिवादन पर मुख्यमंत्री ने आभार व्यक्त किया और इसे उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक का सम्मान बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा, “यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे त्रिवेणी की पवित्र भूमि और महाकुंभ के इस शुभ अवसर पर पूज्य संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘विकसित भारत’ की दृष्टि में पूज्य संतों का आशीर्वाद सबसे महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री ने इस सम्मान को उत्तराखंड के सभी नागरिकों का सम्मान मानते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया समान नागरिक संहिता का महत्व

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने उत्तराखंड की जनता के सामने समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें आशीर्वाद दिया, जिसके बाद राज्य सरकार ने पहले मंत्रिमंडल बैठक में इस पर कमेटी का गठन किया और तत्पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया, जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई।

धामी ने कहा कि देवभूमि में अब सभी धर्मों और जातियों के लिए एक समान कानून हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से ही संभव हो सका है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माताओं ने भी समान कानूनों का प्रावधान किया था, और आज उत्तराखंड इस दिशा में एक अग्रणी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने देवभूमि को एक ऐतिहासिक स्थान बताया, जहां हर घर का सदस्य सेना में है और देश की सेवा कर रहा है।

महाकुंभ और सनातन संस्कृति का अद्भुत मेल

मुख्यमंत्री धामी ने महाकुंभ के संदर्भ में कहा कि यह हमारी सनातन संस्कृति की विशालता का प्रतीक है, जो समरसता और समानता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के इस अवसर पर संतों का आशीर्वाद मिलना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। धामी ने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति हमें समानता का अधिकार देती है, और इसी प्रेरणा से राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने का साहसिक निर्णय लिया।

समान नागरिक संहिता को एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के लिए एक दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड से शुरू हुई यह पहल पूरे देश में फैल जाएगी, और यह देश में समानता और न्याय के रास्ते पर एक नया अध्याय जोड़ेगी।

संतों ने मुख्यमंत्री धामी की सराहना की

कार्यक्रम के दौरान आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने मुख्यमंत्री धामी की सराहना करते हुए कहा, “उत्तराखंड जैसा दिव्य स्थान कहीं नहीं है। मुख्यमंत्री धामी सभी संतों के प्रिय हैं, और उन्होंने यूसीसी लागू करके भारत को मजबूती दी है।” उन्होंने कहा कि भारत के संत मुख्यमंत्री धामी के साथ हैं और उत्तराखंड सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू करने के मामले में सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है।

स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने भी मुख्यमंत्री की सेवा की सराहना करते हुए कहा, “उत्तराखंड की पावन भूमि, मां गंगा और मां यमुना ने मुख्यमंत्री धामी को चुना है।” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उपासक के रूप में उत्तराखंड की सेवा का संकल्प लिया है, और उनकी मेहनत से ही राज्य ने इस महत्वपूर्ण कानून को लागू किया है।

इस अवसर पर कई अन्य प्रमुख संत भी उपस्थित थे, जिनमें महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज, श्री महंत रविंद्रपुरी जी महाराज, महंत श्री हरि गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर नारायण गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति, महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी महाराज सहित अन्य संतगण और श्रद्धालु शामिल हुए।

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