भारत या अमेरिका नहीं, चीन का असली दुश्मन है तकलामकान रेगिस्तान
अगर आप सोचते हैं कि चीन का सबसे बड़ा दुश्मन भारत या अमेरिका है, तो यह गलतफहमी है। दरअसल, चीन का असली दुश्मन उसके अपने देश के भीतर मौजूद एक विशाल रेगिस्तान है, जिसका नाम तकलामकान रेगिस्तान है। यह रेगिस्तान न सिर्फ चीन के पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की ज़िंदगी और चीन की विकास योजनाओं के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। लगातार फैलते रेत के टीले खेती और बस्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं, साथ ही रेत के तूफान कई बार राजधानी बीजिंग तक को प्रभावित करते हैं।
इसी खतरे को रोकने के लिए चीन ने एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शुरुआत की, जिसे ग्रेट ग्रीन वॉल (Great Green Wall) के नाम से जाना जाता है। चीन ने तकलामकान रेगिस्तान से निकलने वाली रेत को रोकने और रेगिस्तान को फैलने से बचाने के लिए करीब 3,046 किलोमीटर लंबी हरित दीवार तैयार की है। यह दीवार दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मानव-निर्मित हरित संरचना मानी जा रही है। इस हरित पट्टी का काम सिर्फ रेत को रोकना नहीं है, बल्कि यह चीन के लिए जलवायु संरक्षण और आर्थिक लाभ दोनों लेकर आ रही है।
जानकारी के अनुसार, चीन ने इस विशाल प्रोजेक्ट को मात्र 13 वर्षों में पूरा कर दिखाया। इस काम को संभव बनाने में स्थानीय लोगों की अहम भूमिका रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सूखा-रोधी पौधे लगाए और धीरे-धीरे रेत के टीलों पर कृषि शुरू कर दी। इस वनीकरण अभियान ने न सिर्फ रेगिस्तान की रफ्तार धीमी की, बल्कि यहां पर्यटन को भी बढ़ावा दिया। बीजिंग की ओर आने वाले रेत के तूफानों पर नियंत्रण मिलने से वहां की हवा की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ा।
यह हरित पट्टी केवल तकलामकान तक सीमित नहीं रही। चीन की न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट भीतरी मंगोलिया के तीन बड़े रेगिस्तानों को जोड़ने का काम कर रहा है। इसे चीन का “थ्री-नॉर्थ शेल्टरबेल्ट प्रोग्राम” भी कहा जाता है, जो उत्तरी क्षेत्रों में रेगिस्तान को फैलने से रोकने की सबसे बड़ी पहल है। चीन ने अपने उत्तरी हिस्से में वनीकरण को लगातार बढ़ाया है ताकि रेगिस्तान का असर कम हो और कृषि योग्य जमीन की रक्षा हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के लिए यह रेगिस्तान किसी भी बाहरी दुश्मन से बड़ा खतरा है। तकलामकान धीरे-धीरे आसपास की उपजाऊ भूमि को निगल रहा है और इसे सूखी रेतीली जमीन में बदल रहा है। यही कारण है कि चीन ने इस पर काबू पाने के लिए ग्रेट ग्रीन वॉल जैसे बड़े कदम उठाए। चीन की यह रणनीति न सिर्फ पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक पहल का हिस्सा भी बन सकती है।
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