April 20, 2026

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में माता रानी को कौन सा भोग लगाएं? जानिए नौ दिनों के विशेष प्रसाद और उनका महत्व

navratri bhog

चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है। हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि के नौ दिनों की शुरुआत होती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर माता रानी से सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगी। मान्यता है कि इन दिनों मां दुर्गा धरती पर अपने भक्तों के बीच विराजमान होती हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।

नवरात्रि के दौरान माता रानी को अलग-अलग भोग अर्पित करने की परंपरा भी बेहद खास मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर भक्त नौ दिनों तक मां के प्रिय भोग अर्पित करते हैं और प्रसाद को परिवार व जरूरतमंद लोगों में बांटते हैं तो घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। हर दिन मां दुर्गा के अलग स्वरूप की पूजा की जाती है और उसी के अनुसार विशेष भोग लगाया जाता है।

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इस दिन माता को गाय के घी या घी से बने पकवानों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति का शरीर स्वस्थ रहता है। दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। इस दिन माता को शक्कर का भोग अर्पित करने से आयु में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। इस दिन माता को दूध, खीर या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर में धन-वैभव और समृद्धि का आगमन होता है। चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है और उन्हें मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान केले का भोग लगाने से जीवन में सुख-शांति और परिवार में खुशहाली आती है।

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है और इस दिन माता को शहद का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे जीवन के कई प्रकार के दुख और कष्ट दूर होते हैं। सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के दौरान गुड़ का नैवेद्य अर्पित किया जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति मिलती है। आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है और इस दिन माता को नारियल का भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन हलवा, पूड़ी और खीर का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे कन्या पूजन के बाद प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा और भोग अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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