April 17, 2026

सर्वाइकल कैंसर: क्या आप जानती हैं कि ये लक्षण आपके जीवन को खतरे में डाल सकते हैं? जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में एक गंभीर और खतरनाक प्रकार का कैंसर है, जो उनके शरीर के निचले हिस्से में स्थित सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) में उत्पन्न होता है। यह कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होता है, जो लंबे समय तक शरीर में बने रहने के बाद कैंसर का रूप ले सकता है। यह संक्रमण विशेष रूप से उन महिलाओं में अधिक होता है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। हाल के वर्षों में, भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है, और यह समस्या अब महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल हजारों महिलाएं इस खतरनाक बीमारी का शिकार होती हैं। हालांकि, अगर इसे शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है, लेकिन जब यह कैंसर बढ़ जाता है और अंतिम चरण तक पहुँचता है, तो इसका उपचार कठिन हो सकता है। आइए जानते हैं सर्वाइकल कैंसर के कारण, लक्षण और इससे बचाव के उपाय।

सर्वाइकल कैंसर के कारण

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में गायनेकोलॉजी विभाग की डॉ. सलोनी चड्ढा बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर का सबसे प्रमुख कारण HPV संक्रमण है। इस वायरस का संक्रमण महिलाओं के शरीर में प्रवेश करने के बाद धीरे-धीरे सर्विक्स में बदलाव करता है, जिससे कैंसर उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा, कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण शरीर इस संक्रमण से ठीक से लड़ नहीं पाता, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।

धूम्रपान करने वाली महिलाओं में भी सर्वाइकल कैंसर का जोखिम अधिक होता है, क्योंकि तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं। इसके अलावा, गर्भधारण के दौरान महिलाओं का शरीर हॉर्मोनल बदलावों से गुजरता है और सर्विक्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे भी सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक ओरल कांट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन भी हॉर्मोनल इम्बैलेंस का कारण बन सकता है, जो इस कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण प्रारंभिक अवस्था में स्पष्ट नहीं होते, लेकिन जब यह बढ़ता है, तो इसके कुछ सामान्य संकेत सामने आ सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  1. मासिक धर्म के बीच में या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग: अगर इंटरकोर्स के बाद, पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ब्लीडिंग हल्की से लेकर भारी भी हो सकती है।
  2. वजाइना से गाढ़ा, सफेद या लाल डिस्चार्ज: अगर वजाइना से दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज हो रहा है, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।
  3. पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता: यह दर्द लगातार हो सकता है या कभी-कभी महसूस हो सकता है।
  4. इंटरकोर्स के दौरान दर्द या ब्लीडिंग: अगर आपको सेक्स के दौरान दर्द या ब्लीडिंग हो रही है, तो यह भी एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है।
  5. बार-बार पेशाब आना या पेशाब करते समय जलन महसूस होना: पेशाब में खून आना या पेशाब के दौरान दर्द भी सर्वाइकल कैंसर के संकेत हो सकते हैं।
  6. कमजोरी और तेजी से वजन कम होना: शरीर में कमजोरी और अचानक वजन का घटना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
  7. लिम्फ नोड्स में सूजन: सर्वाइकल कैंसर लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर सकता है, जिससे पैरों में सूजन आ सकती है।

अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय रहते इलाज करवाना इस बीमारी के खतरे को कम कर सकता है।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उपाय

सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है, यदि हम कुछ आसान कदमों को अपने जीवन में शामिल करें। आइए जानें इसके प्रमुख बचाव उपाय:

  1. HPV वैक्सीन: यह सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। 9 से 26 वर्ष की उम्र की लड़कियों और महिलाओं को यह वैक्सीन लगवानी चाहिए, क्योंकि यह HPV संक्रमण के जोखिम को कम करता है।
  2. पैप स्मीयर टेस्ट: 21 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को हर 3 साल में पैप स्मीयर टेस्ट कराना चाहिए। यह टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचानने में मदद करता है, जिससे इलाज आसान हो जाता है।
  3. सुरक्षित सेक्स: सेक्स के दौरान कंडोम का उपयोग करें। इससे HPV संक्रमण का खतरा कम हो सकता है, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है।
  4. धूम्रपान से बचें: धूम्रपान छोड़कर आप सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम कर सकती हैं, क्योंकि तंबाकू इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है।
  5. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं: एक स्वस्थ आहार और नियमित एक्सरसाइज करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, जिससे आपका शरीर HPV संक्रमण के खिलाफ बेहतर तरीके से लड़ सकता है।

निष्कर्ष

सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर इसे शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है। इस खतरनाक बीमारी से बचाव के लिए उचित उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है। HPV वैक्सीनेशन, पैप स्मीयर टेस्ट और एक स्वस्थ जीवनशैली की आदतें आपके शरीर को इस बीमारी से सुरक्षित रख सकती हैं। इसलिए, अगर आपको इनमें से कोई लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जल्द से जल्द जांच करवाएं। आपका स्वास्थ्य आपके हाथ में है, और समय रहते जागरूकता और इलाज से आप इस खतरनाक बीमारी से बच सकती हैं।

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