April 17, 2026

भारत में CAR T-Cell Therapy का प्रभाव: कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, लेकिन साइड इफेक्ट्स भी चिंता का कारण

भारत में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, और इस बढ़ती महामारी से निपटने के लिए नए उपचारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। 2022 में, National Institutes of Health (NIH) के मुताबिक, भारत में कैंसर के 14 लाख 61 हजार से अधिक मामले सामने आए थे। ऐसे में कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद के रूप में CAR T-Cell Therapy को लेकर एक स्टडी सामने आई है, जो यह बताती है कि इस उपचार का भारतीय मरीजों पर क्या असर हुआ है।

क्या है CAR T-Cell Therapy?

CAR T-Cell Therapy, जिसे काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल थेरेपी कहा जाता है, एक उन्नत इम्यून थैरेपी है जो शरीर के इम्यून सेल्स को ट्रेन करती है ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचान सकें और उन्हें नष्ट कर सकें। यह थेरेपी विशेष रूप से रक्त कैंसर (blood cancer) के इलाज के लिए डिजाइन की गई है और उन मरीजों को दी जाती है जिनमें कैंसर फिर से लौट आता है या जिनमें पहले उपचारों का कोई असर नहीं होता।

भारत में CAR T-Cell Therapy की सफलता

हाल ही में लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भारत में किए गए CAR T-Cell Therapy के क्लीनिकल ट्रायल्स के परिणामों को साझा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में किए गए पहले CAR T-Cell Therapy के क्लीनिकल ट्रायल्स में 73% मरीजों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। इसका मतलब है कि करीब 73% मरीजों ने इस थेरेपी से लाभ पाया है, जो कि एक उम्मीद की किरण है।

भारत के औषधि नियामक (Drug Regulator) ने 2023 में इस थेरेपी को मंजूरी दी थी, और अब यह देश के प्रमुख अस्पतालों जैसे अपोलो, फोर्टिस, अमृता, और मैक्स में उपलब्ध है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस थेरेपी ने विशेष रूप से तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) और बड़े बी सेल लिम्फोमा के मरीजों पर प्रभाव दिखाया है। इन मरीजों में औसतन छह महीने और चार महीने तक जीवित रहने की सूचना मिली है।

साइड इफेक्ट्स: क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

हालांकि CAR T-Cell Therapy के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर साइड इफेक्ट्स भी जुड़े हैं। स्टडी में पाया गया कि इस थेरेपी के बाद हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (Haemophagocytic Lymphohistiocytosis) के हाई केस सामने आए हैं, जो एक ऐसी स्थिति है, जिसमें इम्यून सेल्स अनियंत्रित रूप से सक्रिय हो जाती हैं, जिससे सूजन और अंगों का नुकसान हो सकता है।

यह समस्या अध्ययन में शामिल हुए 12% मरीजों में पाई गई, जिसके कारण कम से कम एक मरीज की मृत्यु भी हो गई। इसके अलावा, स्टडी में यह भी बताया गया है कि थेरेपी के सामान्य साइड इफेक्ट्स में एनीमिया, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (रक्त प्लेटलेट्स की कमी), न्यूट्रोपेनिया (सफेद रक्त कोशिकाओं की कमी), और फ़ेब्राइल न्यूट्रोपेनिया (बुखार के साथ न्यूट्रोपेनिया) जैसी समस्याएं शामिल हैं।

CAR T-Cell Therapy कैसे काम करती है?

इस थेरेपी के दौरान, सबसे पहले मरीज के खून से टी-सेल (immune cells) इकट्ठा किए जाते हैं। फिर इन कोशिकाओं को एक प्रयोगशाला में रिसेप्टर्स से जोड़ा जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को पहचान सकते हैं। इसके बाद, इन टी-सेल्स को लाखों की संख्या में बढ़ाया जाता है और मरीज में वापस डाला जाता है। इस प्रक्रिया के बाद, ये इम्यून कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट करना शुरू कर देती हैं।

भारत में CAR T-Cell Therapy की स्थिति

भारत में इस अत्याधुनिक उपचार का आरंभ एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, खासकर इस तथ्य को देखते हुए कि अन्य देशों में यह तकनीक बहुत महंगी है और कम देशों में ही उपलब्ध है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, और अन्य विकसित देशों में CAR T-Cell Therapy पहले से उपलब्ध है। भारत में भी इस उपचार की लागत करीब 25 लाख रुपये तक हो सकती है, जो इसे केवल कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही सुलभ बनाता है।

निष्कर्ष

भारत में CAR T-Cell Therapy की शुरुआत ने कैंसर के इलाज के क्षेत्र में नई उम्मीद की किरण जलाई है। यह थेरेपी खासतौर पर उन मरीजों के लिए है जिनकी कैंसर से लड़ने की क्षमता अन्य पारंपरिक उपचारों से नहीं हो पाती। हालांकि, इसके साइड इफेक्ट्स और उच्च लागत इस थेरेपी को चुनिंदा लोगों तक ही पहुंचने का कारण बन सकते हैं। फिर भी, इस तकनीक के भारत में आने से कैंसर के इलाज में एक नई दिशा मिल सकती है, और यह भविष्य में और अधिक मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है।

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