दिल की बीमारी से बचने के लिए स्टंट या बाईपास सर्जरी: क्या है सही विकल्प? जानें एक्सपर्ट की राय
आजकल दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, और इनमें से सबसे आम समस्या हार्ट ब्लॉकेज की है। जब दिल की धमनियों में रुकावट आ जाती है, तो खून सही तरीके से पंप नहीं हो पाता, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। अगर किसी व्यक्ति के दिल में ब्लॉकेज है, तो उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या उन्हें स्टंट लगवाना चाहिए या बाईपास सर्जरी करवानी चाहिए? कई लोग इस स्थिति में कन्फ्यूज रहते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए, और कौन सा विकल्प उनके लिए बेहतर है। इस बारे में हमने विशेषज्ञ डॉ. अजीत जैन से विस्तार से जानकारी ली है।
क्या है स्टंट और कब किया जाता है?
दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि स्टंट एक छोटा जालीदार ट्यूब होता है, जिसे ब्लॉक हुई धमनी में डाला जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि खून का बहाव सही तरीके से बना रहे। यह तरीका तब अपनाया जाता है, जब ब्लॉकेज ज्यादा गंभीर नहीं होता और सिर्फ 1-2 जगह धमनियों में रुकावट होती है। स्टंट डालने के बाद मरीज जल्दी रिकवर कर पाता है और उसे ज्यादा दिनों तक अस्पताल में रुकने की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, स्टंट के साथ एक समस्या भी हो सकती है। कुछ मामलों में ब्लॉकेज फिर से हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को फिर से इलाज की जरूरत पड़ सकती है। स्टंट डालने के बाद मरीज को कई महीनों तक खून पतला करने की दवाएं खानी पड़ती हैं। स्टंट डालने से पहले कई प्रकार की जांच भी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज के लिए यह उपाय सही है।
बाईपास सर्जरी की कब होती है जरूरत?
अगर ब्लॉकेज ज्यादा बढ़ चुका है और कई धमनियों में रुकावट है, तो डॉक्टर को यह महसूस हो सकता है कि स्टंट से काम नहीं चलेगा। ऐसी स्थिति में बाईपास सर्जरी की आवश्यकता होती है। इस सर्जरी में शरीर की किसी और नस को लेकर ब्लॉक हुई धमनी के पास जोड़ दिया जाता है, जिससे खून का बहाव नए रास्ते से होने लगता है। यह उपाय स्टंट से ज्यादा प्रभावी होता है, लेकिन बाईपास सर्जरी एक बड़ी प्रक्रिया है, जिसके बाद रिकवरी में समय लगता है और मरीज को ज्यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है।
स्टंट या बाईपास सर्जरी: कौन सा विकल्प बेहतर है?
डॉ. अजीत जैन के अनुसार, यह पूरी तरह से मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि ब्लॉकेज कम है और दिल ज्यादा कमजोर नहीं है, तो स्टंट एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। लेकिन अगर ब्लॉकेज ज्यादा है, मरीज को डायबिटीज की समस्या है, या पहले हार्ट अटैक आ चुका है, तो बाईपास सर्जरी ज्यादा सही रहेगी।
इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी फैसला न लें। यदि डॉक्टर बाईपास सर्जरी की सलाह दे रहे हैं, तो वही सबसे उपयुक्त विकल्प होगा। डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करें और सही समय पर इलाज कराएं।
हार्ट को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
डॉ. जैन बताते हैं कि दिल में ब्लॉकेज जैसी समस्याओं से बचने के लिए जीवनशैली और खानपान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते सावधानी बरती जाए, तो दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक हेल्दी डाइट अपनाना चाहिए। खाने में तेल-मसाले कम करके हरी सब्जियां और फल शामिल करें। ज्यादा नमक और चीनी से बचें, क्योंकि ये हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, नियमित एक्सरसाइज, स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल और योग प्रणायाम को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इन आदतों से दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है और हार्ट ब्लॉकेज की समस्याओं से बचाव संभव है।
निष्कर्ष:
दिल की बीमारियों के इलाज में स्टंट और बाईपास सर्जरी दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं, और यह पूरी तरह से मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है कि उन्हें कौन सा विकल्प अपनाना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी निर्णय को डॉक्टर की सलाह पर ही लिया जाए। यदि आप दिल के रोग से बचना चाहते हैं, तो अपनी जीवनशैली को सुधारें, हेल्दी डाइट अपनाएं, और नियमित व्यायाम करें।
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