April 29, 2026

ब्रिटेन में युद्ध की चेतावनी: रूस को बताया सबसे बड़ा खतरा, रक्षा प्रमुख ने जंग के लिए तैयार रहने को कहा

रूसी जासूसी नेटवर्क, यूरोप में तोड़फोड़ और बढ़ती सैन्य ताकत से UK की चिंता बढ़ी

रूस और ब्रिटेन के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। ब्रिटेन ने खुले तौर पर रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपने नागरिकों को युद्ध की आशंका के लिए तैयार रहने को कहा है। ब्रिटिश चीफ ऑफ डिफेंस और खुफिया एजेंसी MI6 के प्रमुख के बयानों के बाद इस मुद्दे ने और गंभीर रूप ले लिया है। ब्रिटेन की संसद की इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी कमिटी (ISC) की हालिया रिपोर्ट में रूस को देश के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा बताया गया है।

ISC की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने यूरोप में अस्थिरता फैलाने और तोड़फोड़ की गतिविधियों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन के भीतर सक्रिय रूसी जासूसी नेटवर्क मौजूद है, जो विदेशी नागरिकों और प्रॉक्सी एजेंट्स के जरिए गुप्त ऑपरेशन चला रहा है। मार्च 2025 में एक रूसी स्पाई रिंग के सदस्यों को सजा सुनाए जाने का भी जिक्र किया गया है, जिससे रूस की गतिविधियों को लेकर ब्रिटेन की चिंता और बढ़ गई है।

ब्रिटेन सरकार ने रूस के खिलाफ पहले ही कई सख्त कदम उठाए हैं। मई 2024 में एक रूसी डिफेंस अताशे को देश से निष्कासित किया गया था। इसके अलावा रूस को Foreign Influence Registration Scheme के Enhanced Tier में डाला गया है। ISC की चेतावनी है कि रूसी गतिविधियां अब सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सीधे तौर पर ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस पश्चिमी देशों के यूक्रेन समर्थन को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

इस बीच ब्रिटेन की सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख और एयर चीफ मार्शल सर रिचर्ड नाइटन ने कड़ा बयान देते हुए कहा है कि देश के बेटे और बेटियों को लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस की सैन्य ताकत लगातार बढ़ रही है और यूक्रेन युद्ध के चलते रूसी सैनिक युद्ध में ज्यादा अनुभवी और खतरनाक हो चुके हैं। उनके मुताबिक मौजूदा हालात उनके पूरे करियर में सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं और शांति की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है।

एयर चीफ मार्शल नाइटन ने यह भी बताया कि रूस ने पिछले दो दशकों में अपनी सशस्त्र सेनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। रूस की सेना की संख्या 11 लाख से अधिक हो चुकी है और वह अपनी जीडीपी का 7 प्रतिशत से ज्यादा रक्षा पर खर्च कर रहा है। इसके मुकाबले ब्रिटेन की सेना की संख्या करीब 70 हजार है और रक्षा बजट को 2027 तक जीडीपी के 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाने की ही योजना है। इन आंकड़ों के बीच रूस-ब्रिटेन टकराव की आशंका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।

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