ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में अक्सर ब्रेस्ट हटाना पड़ता है, लेकिन रिकंस्ट्रक्शन से शरीर की बनावट और आत्मविश्वास फिर से लौट सकता है
भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और कई महिलाओं को इस कैंसर से निपटने के लिए सर्जरी के दौरान ब्रेस्ट हटाना पड़ता है। यह सर्जरी जीवन रक्षक होती है, लेकिन इससे शरीर की बनावट और महिलाओं का आत्मविश्वास प्रभावित होता है। ऐसे में ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी महिलाओं के लिए राहत की खबर बन गई है। यह प्रक्रिया शरीर की समरूपता और ब्रेस्ट के आकार को पुनः बनाए रखती है, जिससे महिलाएं मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से मजबूत महसूस करती हैं।
डॉ. वेंकट रामकृष्णन, अपोलो एथेना विमेंस कैंसर सेंटर के प्लास्टिक एवं ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग में बताते हैं कि हाल के वर्षों में ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन तकनीक में काफी प्रगति हुई है। माइक्रोसर्जिकल रिकंस्ट्रक्शन के जरिए मैस्टेक्टॉमी के साथ ही नया ब्रेस्ट बनाया जा सकता है। इसमें मरीज के अपने टिशू (जैसे पेट की चर्बी) का इस्तेमाल किया जाता है। अनुभवी सर्जनों द्वारा की जाने पर इस प्रक्रिया की सफलता दर 99% से अधिक है। यह सर्जरी आम तौर पर केवल 2 घंटे अतिरिक्त समय लेती है।
डॉ. वेंकट कहते हैं कि यह सर्जरी सुरक्षित है और कैंसर या जीवन पर किसी प्रकार का जोखिम नहीं बढ़ाती। नया ब्रेस्ट पूरी तरह प्राकृतिक होता है और उम्र के साथ शरीर के अन्य हिस्सों की तरह स्वाभाविक रूप से बदलता है। कई मामलों में, मैस्टेक्टॉमी और रिकंस्ट्रक्शन एक साथ करने से पोस्ट-सर्जरी रेडियोथेरेपी की आवश्यकता भी कम हो जाती है। एब्डोमिनल टिश्यू का इस्तेमाल शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाने और समग्र सौंदर्य बढ़ाने में भी मदद करता है।
ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन सिर्फ कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता दोबारा पाने में मदद करता है। यह उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिनकी मैस्टेक्टॉमी हो चुकी हो। डॉ. वेंकट के अनुसार, महिला का शुगर, ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ कंट्रोल में होना जरूरी है, और शरीर में पर्याप्त टिशू होना चाहिए ताकि सर्जरी सफल हो।
इस सर्जरी से महिलाएं न केवल अपने शरीर के रूप को वापस पा सकती हैं, बल्कि कैंसर से उबरने के बाद अपनी पहचान और आत्मसम्मान भी पुनः प्राप्त कर सकती हैं।
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