भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित ट्रेड डील को लेकर वार्ताएं एक बार फिर रफ्तार पकड़ रही हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 2023–24 में लगभग 200 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है, और अब इसे 2030 तक दोगुना करने का साझा लक्ष्य तय किया गया है। इसी दिशा में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के उच्चस्तरीय दल का दिल्ली पहुंचना बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली में शुरू हुई दो दिवसीय बैठक को संभावित पहले चरण वाले ट्रेड पैक्ट की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है, जिसने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देने की संभावनाएं बढ़ा दी हैं।
वार्ता के शुरुआती चरण में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि कई जटिल और संवेदनशील मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की टीमें उन बिंदुओं पर फोकस कर रही हैं जहां जल्दी समाधान निकाला जा सकता है, ताकि आगे चलकर बड़ा, व्यापक और दीर्घकालिक व्यापार समझौता संभव हो सके। गोयल का यह रुख संकेत देता है कि इस बार दोनों पक्ष पहले छोटे किन्तु महत्वपूर्ण मोर्चों पर सहमत होने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे आगे की बातचीत सहज और मजबूत आधार पर आगे बढ़ सके।
इस बैठक में कृषि, स्टील और एल्यूमिनियम टैरिफ, मेडिकल डिवाइसेज़, आईटी सेवाओं और बाजार पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा तय है। अमेरिकी पक्ष लंबे समय से भारत के कुछ प्रमुख उत्पादों पर लगे ऊंचे टैरिफ को कम करने की मांग करता रहा है, जिसे वह मुक्त और पारदर्शी व्यापार का हिस्सा मानता है। इसके विपरीत भारत की प्राथमिकता उन क्षेत्रों में स्थिर और व्यावहारिक बाजार पहुंच सुनिश्चित करने की है, जो भारतीय निर्यात का आधार माने जाते हैं। भारतीय उद्योग जगत का भी मानना है कि यदि अमेरिका की ओर से बाजार पहुंच की गारंटी मिलती है, तो भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी स्थान मिल सकता है।
हाल के वर्षों में दोनों देशों ने कई व्यापारिक विवाद सुलझाकर वार्ता का माहौल पहले से बेहतर बनाया है। उदाहरण के तौर पर भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कुछ टैरिफ में आंशिक कटौती की है, जबकि अमेरिका ने भारतीय स्टील पर सीमा शुल्क से जुड़ी कुछ समस्याओं को कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं। इन प्रयासों ने दोनों देशों के बीच भरोसे का स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भविष्य की वार्ताओं के लिए एक स्थिर माहौल तैयार किया है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दौर की बातचीत सफल रहती है, तो अगले कुछ वर्षों में निवेश के स्तर में भारी बढ़ोतरी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में तेजी और सप्लाई चेन साझेदारी को नया ढांचा मिल सकता है। वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका का सहयोग आर्थिक स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि इस बैठक के परिणामों पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया का पहला चरण सफल हुआ, तो यह न सिर्फ दोनों देशों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत लेकर आएगा।
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