April 21, 2026

BMC Polls Controversy: मुंबई पर अन्नामलाई के बयान से गरमाई सियासत, चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक टकराव

बीएमसी चुनाव से पहले बयान बना सियासी मुद्दा

महाराष्ट्र में मुंबई समेत कई नगर निगमों के चुनाव अपने अंतिम चरण में हैं और 15 जनवरी को होने वाली वोटिंग से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। खास तौर पर मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव पूरे देश की निगाहों में हैं। इसी बीच तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई के एक बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी और तेज हो गई है।

 

मुंबई को लेकर क्या बोले अन्नामलाई

चुनावी प्रचार के दौरान अन्नामलाई ने मुंबई को “महाराष्ट्र का शहर नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शहर” बताया। उन्होंने ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ की बात करते हुए कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई में बीजेपी का मेयर होने से विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही उन्होंने बीएमसी के बड़े बजट का जिक्र करते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल सही हाथों में होना चाहिए।

 

ठाकरे बंधुओं का तीखा हमला

अन्नामलाई के इस बयान को लेकर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना हमलावर हो गईं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, जो इस चुनाव में साथ आए हैं, ने बीजेपी पर मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। राज ठाकरे ने दादर के शिवाजी पार्क में सभा के दौरान अन्नामलाई पर तंज कसते हुए कहा कि “तमिलनाडु से आए एक नेता ने मुंबई को महाराष्ट्र से अलग बताने की हिम्मत कैसे की।”

 

‘सामना’ में भी तीखी भाषा

शिवसेना (उद्धव) के मुखपत्र सामना ने अन्नामलाई के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मराठी अस्मिता पर हमला बताया। सामना में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी निशाना साधा गया और कहा गया कि सरकार इस बयान को हल्के में लेकर मराठी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है।

 

सीएम फडणवीस ने किया बचाव

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी सतर्क नजर आई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अन्नामलाई के बयान को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अन्नामलाई हिंदी भाषा में पूरी तरह सहज नहीं हैं, इसलिए गलतफहमी हो सकती है। फडणवीस ने दोहराया कि मुंबई महाराष्ट्र का अभिन्न हिस्सा है, साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय शहर भी है।

 

भाषा और पहचान का पुराना विवाद फिर उभरा

इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में भाषा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े पुराने विवादों को फिर से चर्चा में ला दिया है। 1960 के दशक के नारे और मराठी-गैर मराठी टकराव की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे ने सियासी दलों को आमने-सामने ला दिया है।

 

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

बीएमसी चुनाव को लेकर पहले से ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। अन्नामलाई के बयान और उस पर हुई प्रतिक्रिया ने चुनावी बहस को और तेज कर दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि यह विवाद मतदाताओं के फैसले को किस हद तक प्रभावित करता है और मुंबई की सियासत में इसका क्या असर पड़ता है।

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