ब्लड कैंसर हो सकता है जानलेवा: शुरुआत के संकेतों को न करें नजरअंदाज़, विशेषज्ञों की सलाह जरूरी
ब्लड कैंसर, जिसे मेडिकल भाषा में ल्यूकेमिया, लिंफोमा या मायलोमा के नाम से जाना जाता है, एक गंभीर रोग है जो शरीर की खून बनाने वाली प्रणाली यानी बोन मैरो को प्रभावित करता है। इसमें खून की कोशिकाएं — रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स — असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलकर अंगों के कामकाज को बाधित करने लगती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है।
ब्लड कैंसर की शुरुआत कैसे होती है?
शरीर के बोन मैरो में जब किसी एक रक्त कोशिका के डीएनए में गड़बड़ी हो जाती है, तो वह अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है। ये असामान्य कोशिकाएं सामान्य रक्त कोशिकाओं की जगह लेती जाती हैं, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।
किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज़:
बार-बार बुखार या संक्रमण होना:
शरीर की इम्यूनिटी वीक होने से बार-बार बुखार आता है और छोटी-मोटी चोट पर भी संक्रमण जल्दी हो जाता है।
थकान और कमजोरी:
रेड ब्लड सेल्स की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई घट जाती है, जिससे बिना मेहनत के भी थकान महसूस होती है।
नाक या मसूड़ों से खून आना:
प्लेटलेट्स की कमी के चलते खून का थक्का नहीं बन पाता और ब्लीडिंग की समस्या होने लगती है।
वजन कम होना और भूख न लगना:
बिना कोशिश के वजन का गिरना और भूख का कम लगना गंभीर अंदरूनी रोगों की ओर इशारा करता है।
हड्डियों या जोड़ो में दर्द:
बोन मैरो में कैंसर कोशिकाओं की अधिकता के कारण विशेष रूप से पीठ, घुटनों और पैरों में दर्द की शिकायत हो सकती है।
विशेषज्ञों की मानें तो ब्लड कैंसर एक इलाज योग्य बीमारी है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पहचान कितनी जल्दी हुई। यदि उपरोक्त लक्षण बार-बार या लगातार नज़र आएं, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
यह लेख केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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