ब्लैकमेलिंग की दहशत… इंजीनियरिंग छात्र ने हॉस्टल में लगाया फंदा, सुसाइड नोट ने खोली रूह कंपा देने वाली सच्चाई
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जवाहरलाल नेहरू गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, सुंदरनगर के हॉस्टल में कंप्यूटर साइंस के चौथे सेमेस्टर के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। जब साथी छात्र कमरे के बाहर घंटों इंतज़ार करते रहे और अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने दरवाज़ा तोड़ दिया — अंदर का नज़ारा देख सबके होश उड़ गए। छात्र बेल्ट के सहारे पंखे से लटका हुआ था।
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उसे कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ। इस पत्र ने मामले को पूरी तरह पलट दिया। छात्र ने अपनी मौत के लिए एक सहपाठी छात्रा को ज़िम्मेदार ठहराया था। आरोप है कि वह छात्रा उसे ब्लैकमेल कर रही थी और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी।
मृतक की पहचान एक मेहनती और होनहार छात्र के रूप में हुई है, जो कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहा था। सुसाइड नोट और मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसी कॉलेज की दूसरे सेमेस्टर की छात्रा को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की मां ने भी साफ-साफ कहा कि उनका बेटा ब्लैकमेलिंग से मानसिक रूप से इतना टूट चुका था कि उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
पुलिस ने आरोपी छात्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 108 (खुदकुशी के लिए उकसाने) के तहत केस दर्ज किया है। उसे सुंदरनगर के अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।
पोस्टमार्टम के बाद छात्र का शव परिवार को सौंप दिया गया। कॉलेज परिसर में इस घटना के बाद शोक की लहर फैल गई है। छात्रों में डर और सदमे का माहौल है। कॉलेज प्रशासन और पुलिस अब इस बात की तह में जाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ब्लैकमेलिंग की वजह क्या थी और छात्र इतना टूट क्यों गया।
यह घटना न केवल एक परिवार को तोड़ गई, बल्कि शिक्षा संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई है। क्या केवल शिक्षा ही पर्याप्त है, या अब वक्त आ गया है कि हम कॉलेजों में काउंसलिंग और इमोशनल सपोर्ट को भी उतनी ही अहमियत दें जितनी पढ़ाई को देते हैं?
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