April 21, 2026

बिजनौर के किसानों की मेहनत से बदल गई तस्वीर, बेल्जियम की राजकुमारी के आगमन से भारत-बेल्जियम संबंध हुए मजबूत

बिजनौर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में किसानों की मेहनत और तकनीकी सहयोग से एक नई सुबह उभरी है। जहां एक ओर यहां के किसान अपनी कठिनाईयों से जूझ रहे थे, वहीं अब वे अपनी कड़ी मेहनत का फल भी पा रहे हैं। एक ओर जहां बेल्जियम जैसे यूरोपीय देश को इस सहयोग से तगड़ी कमाई हो रही है, वहीं भारत-बेल्जियम के रिश्ते भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गए हैं। हाल ही में बिजनौर में बेल्जियम की राजकुमारी एस्ट्रीड ने दौरा किया, और उनके आगमन ने जिले की तस्वीर को एक नई दिशा दी है। अब यहां के किसानों को शानदार मौके मिल रहे हैं, जो उनके लिए आने वाले दिनों में समृद्धि लेकर आएंगे।

राजकुमारी एस्ट्रीड का दौरा और नई संभावनाओं की शुरुआत
बेल्जियम की राजकुमारी एस्ट्रीड ने बिजनौर का दौरा किया और बेल्जियम की प्रमुख एग्रिस्टो मासा कंपनी की आलू प्रसंस्करण फैक्ट्री के दूसरी यूनिट की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में हिस्सा लिया। यह वही कंपनी है, जिसने 2019 में बिजनौर के महमूदपुर गंज में डेढ़ सौ बीघा जमीन पर ‘ऐग्रिस्टो मासा’ नाम से आलू प्रसंस्करण फैक्ट्री स्थापित की थी। फैक्ट्री में डिहाइड्रेटेड आलू फ्लैक्स यानी आलू पाउडर का उत्पादन किया जाता है, जिसे दुनिया भर में बेचा जाता है।

भारत में विदेशी तकनीकी की धारा
यह फैक्ट्री भारत की जमीन पर स्थापित की गई है, लेकिन यहां इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और मानक बेल्जियम के हैं। हालांकि, इस परियोजना को लागू करते वक्त कोरोना महामारी जैसी बड़ी आपदा का सामना करना पड़ा, लेकिन फिर भी डेढ़ साल के अंदर यह फैक्ट्री तैयार हो गई। यहां के किसानों को आलू की खेती के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें उन्नत बीज, खाद और पेस्टीसाइड दवाइयों का भी वितरण किया गया।

किसानों के लिए आया सुनहरा अवसर
फैक्ट्री के बनने के बाद, ऐग्रिस्टो मासा कंपनी ने बिजनौर के आसपास के 500 किसानों को आलू की खेती के लिए प्रेरित किया। इसके बाद कंपनी ने तकनीकी निगरानी के लिए अपने फील्ड पोटेटो सुपरवाइजर्स को खेतों में भेजा, ताकि किसानों को ज्यादा पैदावार मिल सके। इस तरह, विदेशी तकनीक के जरिए किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन हुआ। इस पहल का परिणाम यह हुआ कि अब तक 2500 से ज्यादा स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है।

विस्तारित सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार
बिजनौर की आलू प्रसंस्करण फैक्ट्री से उत्पादित आलू पाउडर का निर्यात अब तक चिली, अमेरिका, जापान, जर्मनी और कई एशियाई देशों में किया जा चुका है। इस फैक्ट्री से 70 प्रतिशत उत्पाद निर्यात होता है, जबकि 30 प्रतिशत भारतीय बाजार में हल्दीराम, बीकाने, लिज्जत जैसे प्रमुख ब्रांड्स को सप्लाई किया जाता है।

किसान बदल रहे हैं अपनी परंपरागत खेती की दिशा
धीरे-धीरे, अधिक से अधिक किसान आलू की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। अब तक करीब ढाई हजार किसानों ने गन्ने की परंपरागत खेती छोड़कर आलू की खेती में दिलचस्पी दिखाई है। किसान हरिराज राणा और तेजपाल सिंह जैसे किसानों ने आलू की उन्नत प्रजातियों का प्रयोग कर अपनी पैदावार में इजाफा किया है। हरिराज राणा प्रति बीघा 30 कुंतल और प्रति हेक्टेयर 350-400 कुंतल आलू की पैदावार ले रहे हैं। वहीं, तेजपाल सिंह करीब 15 से 20 लाख रुपये सालाना आमदनी हासिल कर रहे हैं।

आलू के उत्पाद पर उच्च गुणवत्ता और अच्छे दाम
ऐग्रिस्टो मासा कंपनी आलू खरीदने के लिए किसानों को 12 से 14 रुपये प्रति किलो का भुगतान करती है। सैंटाना वैरायटी के आलू का वजन 500 से 800 ग्राम तक होता है, और यह फ्रेंच फ्राइज बनाने के लिए आदर्श माना जाता है। कंपनी के डायरेक्टर मनप्रीत सिंह चड्डा ने बताया कि किसानों का रुझान आलू की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि कंपनी उनकी मदद करती है और आलू की बाय बैक गारंटी देती है।

भारत-बेल्जियम के रिश्तों का एक नया अध्याय
बेल्जियम की राजकुमारी के इस दौरे से न केवल बिजनौर के किसानों की किस्मत में बदलाव आया है, बल्कि भारत और बेल्जियम के रिश्तों में भी एक नया अध्याय जुड़ा है। इस सहयोग से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और भी मजबूती मिलेगी। इस पहल से न केवल बिजनौर के किसान लाभान्वित हो रहे हैं, बल्कि भारत को एक मजबूत वैश्विक व्यापारिक साझेदार भी मिल रहा है।

यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि विदेशों से तकनीकी मदद और सही मार्गदर्शन से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेमिसाल बदलाव संभव है, और ये बदलाव आने वाले समय में किसानों की समृद्धि का कारण बन सकते हैं।

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