बिहार मुंगेर: राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पहुंचे खानकाह रहमानी, इंजीनियरों की खान बने इस केंद्र का जाना इतिहास
बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के छठे दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव मुंगेर पहुंचे। यहां दोनों नेता ऐतिहासिक खानकाह रहमानी गए और मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी से मुलाकात की। करीब 20 मिनट चली इस मुलाकात के दौरान शिक्षा, सामाजिक सुधार और राजनीतिक हालात पर बातचीत हुई। खानकाह रहमानी न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आधुनिक शिक्षा और तकनीकी तैयारी में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
खानकाह रहमानी का इतिहास 1901 से जुड़ा है, जब मौलाना मोहम्मद अली मुंगरी ने इसकी स्थापना की थी। उस दौर से लेकर अब तक यह केंद्र सिर्फ इस्लामी तालीम का ही नहीं बल्कि सामाजिक सुधार का भी गढ़ रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के समय यहां से स्वतंत्रता सेनानियों को समर्थन मिला। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, अबुल कलाम आजाद और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे नेता भी यहां आ चुके हैं। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इस खानकाह का दौरा किया था।
समय के साथ खानकाह रहमानी ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी पहचान बनाई। रहमानी फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे ‘रहमानी 30’ प्रोग्राम के जरिए छात्रों को IIT-JEE, NEET, CA और CS जैसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। बीते वर्षों में यहां से हजारों छात्र IITs, NITs और मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पा चुके हैं। इस कारण खानकाह रहमानी को “इंजीनियरों की खान” कहा जाता है। यहां आधुनिक सुविधाओं जैसे स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट के जरिए पढ़ाई कराई जाती है।
इस केंद्र का संचालन वर्तमान में अहमद वली फैसल रहमानी कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा में कई नए कोर्सेज शुरू किए हैं, जैसे मास कम्युनिकेशन, इस्लामिक जुरिसप्रूडेंस और इंग्लिश लैंग्वेज स्किल्स के डिप्लोमा। रहमानी 30 की शाखाएं देशभर में मौजूद हैं और यहां से निकलने वाले छात्र अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपना परचम लहरा चुके हैं। यही वजह है कि खानकाह अब धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा का भी बड़ा केंद्र बन चुका है।
तेजस्वी यादव का परिवार भी लंबे समय से इस खानकाह से जुड़ा रहा है। पिछले साल भी तेजस्वी यहां पहुंचे थे और अपने पिता लालू प्रसाद यादव को फोन पर मौलाना से बातचीत कराई थी। उनका कहना है कि खानकाह रहमानी सिर्फ धार्मिक संस्था नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षिक सुधार की धुरी है। वहीं, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की इस यात्रा ने एक बार फिर से इस ऐतिहासिक खानकाह को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
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