April 29, 2026

रूस में 7.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी अलर्ट जारी

रूस के कामचटका प्रायद्वीप में शनिवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर गहराई में था, जिसके कारण पूर्वी तट के आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बन गया। अधिकारियों ने तुरंत 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले समुद्र तटों पर सुनामी की चेतावनी जारी कर दी। राहत की बात यह है कि अब तक किसी जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।

 

यह झटका ऐसे समय आया है जब ठीक एक महीने पहले जुलाई में इसी क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था। उस भूकंप के कारण प्रशांत महासागर में लगभग 4 मीटर ऊंची सुनामी लहरें उठीं थीं। इसके चलते हवाई, जापान और अन्य तटीय क्षेत्रों में लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया था। जापान में तो करीब 20 लाख लोगों को ऊंचे इलाकों में जाने का आदेश देना पड़ा था। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर चेतावनी हटा ली गई थी।

 

कामचटका क्षेत्र को भूकंप-प्रवण इलाका माना जाता है। यहां समय-समय पर तेज झटके आते रहते हैं। 1952 में इस क्षेत्र में 9.0 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था, जिसे अब तक के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जाता है। हाल के वर्षों में भी इस इलाके में बार-बार भूकंप दर्ज किए गए हैं, जिससे यहां के लोगों में हमेशा एक भय का माहौल बना रहता है।

 

भूकंप की तीव्रता और श्रेणी को लेकर वैज्ञानिक बताते हैं कि 3 से 4.9 तक की तीव्रता को हल्का भूकंप माना जाता है। वहीं 5 से 6.9 तक मध्यम से तीव्र श्रेणी में आते हैं। 7 से 7.9 तक के भूकंप ‘मेजर’ कहलाते हैं और 8 या उससे ज्यादा तीव्रता के भूकंप बेहद खतरनाक और विनाशकारी साबित हो सकते हैं। कामचटका में हालिया झटका इसी ‘मेजर’ श्रेणी में आता है, जो बड़े नुकसान की आशंका पैदा करता है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, पूरी धरती 12 टेक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। ये प्लेटें हर साल 4 से 5 मिलीमीटर की गति से खिसकती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिसे भूकंप के रूप में महसूस किया जाता है। प्रशांत महासागर के किनारे स्थित कामचटका ऐसी ही भूवैज्ञानिक गतिविधियों का केंद्र है, जहां प्लेटों के खिसकने और टकराने से अक्सर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं। यही कारण है कि यहां के तटीय क्षेत्रों को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।

 

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