भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे का अंत! 40 साल बाद जलकर खाक हुआ विनाश का आखिरी सबूत
भोपाल गैस त्रासदी, जिसे भारत के सबसे बड़े औद्योगिक हादसे के रूप में जाना जाता है, उसके जहरीले अतीत का आखिरी चिह्न अब खत्म हो गया है। पूरे 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के परिसर में जमा आखिरी 337 टन जहरीले कचरे को नष्ट कर दिया गया है। यह प्रक्रिया 55 दिनों तक चली, जिसमें कई चरणों में इस बेहद संवेदनशील और विवादास्पद कचरे का निपटान किया गया।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में इस खतरनाक प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। सबसे पहले इस कचरे को मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित डिस्पोजल प्लांट में ट्रांसफर किया गया था। यहां पर 6 महीने पहले 337 टन कचरे को कंटेनर में भरकर लाया गया था। प्रारंभिक परीक्षणों के दौरान 30 टन कचरा पहले ही जला दिया गया था, जबकि बाकी बचे 307 टन को 5 मई से लेकर 29 और 30 जून की आधी रात तक क्रमशः जलाया गया।
हालांकि इस निपटान प्रक्रिया को लेकर विवाद भी गहरा गया था। स्थानीय लोगों ने कचरे को जलाए जाने का विरोध किया, उनका कहना था कि इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 27 मार्च 2025 को दिए गए निर्देश के बाद, तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में अधिकतम 270 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से इस कचरे को वैज्ञानिक रूप से जलाया गया।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया के बाद जो राख और अवशेष बचे हैं, उन्हें लीक-प्रूफ स्टोरेज में रखा गया है। इन्हें सुरक्षित तरीके से जमीन में दफनाने के लिए एक विशेष लैंडफिल सेल तैयार किया जा रहा है, जो नवंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अतिरिक्त यूनियन कार्बाइड परिसर की मिट्टी में मौजूद 19 टन अतिरिक्त कचरे को भी पीथमपुर संयंत्र में जलाया जा रहा है, जो 3 जुलाई 2025 तक पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।
यह घटनाक्रम एक ऐसे अध्याय का अंतिम पन्ना है, जिसने 2 दिसंबर 1984 की रात देश को हिला कर रख दिया था। यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था, जिससे करीब 5,479 लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे। अब जब 40 साल बाद उस त्रासदी के आखिरी अवशेष को मिटा दिया गया है, तो यह केवल एक सफाई नहीं, बल्कि इतिहास के जख्मों पर मरहम लगाने जैसा है।
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