April 21, 2026

दिल्ली-NCR के निवेशकों के साथ धोखाधड़ी: भूटानी ग्रुप पर 3500 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, ईडी ने मारा छापा

नई दिल्ली, 4 मार्च 2025: दिल्ली-NCR में घर या प्लॉट खरीदने का सपना देख रहे निवेशकों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। रियल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख कंपनी भूटानी ग्रुप पर आरोप लगे हैं कि उसने हजारों निवेशकों से 3500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई, लेकिन उन्हें वादा किए गए प्लॉट नहीं दिए और निवेशकों की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया। इस धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में भूटानी ग्रुप और उसके प्रमोटरों के खिलाफ छापेमारी की, जिससे कई गंभीर और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

सिंगापुर और अमेरिका में निवेश करने का आरोप
ईडी के अधिकारियों के अनुसार, भूटानी ग्रुप के प्रमोटरों ने निवेशकों से एक बड़ा पैसा जुटाया, लेकिन उनके द्वारा वादा किया गया लाभ और प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया गया। इसके बजाय, इन पैसे को विदेशों में सिंगापुर और अमेरिका में निवेश किया गया, जबकि करीब 200 करोड़ रुपये का इस्तेमाल निजी संपत्तियों की खरीददारी में किया गया। इसके अलावा, प्रमोटरों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के आय का गबन भी किया। ईडी ने इस मामले में अब तक कई संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए हैं और आरोपियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं।

डॉक्यूमेंट्स से खुलासा: 15 प्रोजेक्ट्स, 3500 करोड़ रुपये का घोटाला
ईडी ने छापेमारी के दौरान 15 प्रमुख प्रोजेक्ट्स के लिए जुटाए गए 3500 करोड़ रुपये से अधिक के दस्तावेज बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों में यह भी संकेत मिला है कि यह मामला एक सुनियोजित पोंजी स्कीम जैसा है, जिसमें शेल कंपनियों के जरिए विदेशों में संपत्ति बनाई गई। यह भी सामने आया है कि भूटानी ग्रुप और डब्ल्यूटीसी ग्रुप के बीच कुछ गहरे संबंध थे और इसी कनेक्शन के तहत कई प्रोजेक्ट्स के दस्तावेजों में घपला हुआ है।

27 फरवरी को 12 जगहों पर की गई छापेमारी
ईडी ने 27 फरवरी को दिल्ली, फरीदाबाद और अन्य स्थानों पर 12 जगहों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में भूटानी ग्रुप के प्रमोटर आशीष भूटानी और आशीष भल्ला के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की पुष्टि हुई। फरीदाबाद और दिल्ली में दर्जनों एफआईआर भी सामने आई हैं। ईडी के अनुसार, यह मामला 10 साल से भी अधिक पुराना है, जब प्लॉट खरीदारों से पैसा जुटाने के बावजूद उन्हें समय पर प्लॉट नहीं दिए गए और उनके पैसे हड़प लिए गए।

भूटानी ग्रुप के खिलाफ कई गंभीर आरोप
ईडी ने दावा किया है कि भूटानी ग्रुप ने 10 साल से अधिक समय तक अपने निवेशकों से धोखा किया और कई बार वादों का उल्लंघन किया। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन और संपत्तियों का गबन किया गया है। एफआईआर में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि प्रमोटरों ने डब्ल्यूटीसी ग्रुप के साथ मिलकर फरीदाबाद के सेक्टर 111-114 में एक नया प्रोजेक्ट री-लॉन्च किया और निवेशकों को इस भ्रम में रखा कि उन्हें उनके प्लॉट जल्द मिल जाएंगे।

भूटानी ग्रुप का बयान और डब्ल्यूटीसी ग्रुप के साथ संबंध
इस मामले के सामने आने के बाद, भूटानी ग्रुप ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि उसने हाल ही में डब्ल्यूटीसी ग्रुप के साथ सभी संबंध तोड़ दिए हैं और अब वह पूरी तरह से ईडी के साथ सहयोग कर रहा है। हालांकि, डब्ल्यूटीसी ग्रुप ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ईडी ने कहा कि भूटानी ग्रुप और डब्ल्यूटीसी ग्रुप के बीच संबंधों की जांच जारी है और यह पाया गया है कि कई संपत्तियां भूटानी ग्रुप के नाम पर ट्रांसफर की गईं, जिससे घपला हुआ है।

निवेशकों के लिए चेतावनी
भूटानी ग्रुप और डब्ल्यूटीसी ग्रुप के खिलाफ चल रही जांच ने अब दिल्ली-NCR में रियल एस्टेट निवेशकों को एक बड़ी चेतावनी दी है। यह मामला उन लोगों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, जो भविष्य में रियल एस्टेट निवेश करना चाहते हैं, लेकिन सही जानकारी और निवेश के उचित विकल्प की तलाश किए बिना आगे बढ़ते हैं। इस मामले में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि बड़ी कंपनियों के बीच इस तरह के घोटालों से निवेशक अपनी कड़ी मेहनत की कमाई को गंवा सकते हैं।

अब देखना यह होगा कि ईडी की जांच में और क्या- क्या खुलासे होते हैं और इस मामले में आरोपी प्रमोटरों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होती है। इसके अलावा, क्या इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में और अधिक कड़ी निगरानी और नियामक कदम उठाए जाएंगे?

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