April 20, 2026

भागलपुर में रामनवमी पर भगवान राम की विराट पोर्ट्रेट आर्ट ने किया हैरान, वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर कदम

भागलपुर, बिहार: रामनवमी के अवसर पर भागलपुर के लाजपत पार्क मैदान में एक ऐसी अद्भुत कलाकृति उकेरी गई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। भगवान श्री राम की 120 फीट लंबी और 85 फीट चौड़ी विराट पोर्ट्रेट आर्ट ने सबका ध्यान आकर्षित किया। यह कलाकृति न केवल अपनी भव्यता के लिए जानी जा रही है, बल्कि यह पृथ्वी पर वेस्ट मटेरियल से बनी अब तक की सबसे बड़ी कलाकृति भी है। इस आर्टवर्क को बनाने में 10200 वर्ग फीट की जगह ली गई और इसे बनाने के लिए गंगा से निकलने वाली रेत, वेस्ट मटेरियल, आरारोट डस्ट, लकड़ी का बुरादा, कोयला पाउडर और प्राकृतिक रंगों के साथ कुल 15 रंगों का इस्तेमाल किया गया है।

भागलपुर के स्थानीय कलाकार अनिल कुमार और उनके आठ सहयोगियों ने चार दिनों में भगवान राम की इस विराट छवि को उकेरा। खास बात यह है कि इस कलाकृति को वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने पंजीकृत किया है और जल्द ही इसकी विधिवत घोषणा की जाएगी। यह कलाकृति वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में शामिल होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि धरती पर कहीं भी इस प्रकार की विशाल कलाकृति वेस्ट मटेरियल से नहीं बनाई गई है। यह जानकारी रामनवमी महोत्सव के संयोजक अर्जित चौबे ने दी।

रामनवमी महोत्सव की शुरुआत स्थानीय सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलित करने के साथ हुई। बाबा बूढ़ानाथ मंदिर के लक्ष्मण पंडित ने मंत्रोच्चारण के साथ महोत्सव का शुभारंभ किया। हिंदू नववर्ष के इस पावन अवसर पर हजारों की संख्या में बच्चे और उनके परिजन भगवान राम के चरणों में दीप अर्पित करने पहुंचे। हजारों दीपों की जगमगाहट से एक दिव्य वातावरण बना, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अर्जित चौबे ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। विक्रम संवत् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जो इस देश का अपना नववर्ष है, को हर्षोल्लास के साथ मनाना हमारा कर्तव्य है। रामनवमी महोत्सव में भजन संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें चेतन चौबे और उनके दल ने शानदार प्रस्तुति दी और उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नववर्ष स्वदेशी मेला भी इस दौरान आयोजित किया गया, जिसमें भागलपुर के युवाओं ने विभिन्न स्टॉल्स पर खाना, खेल और अन्य आकर्षक गतिविधियों का आयोजन किया। श्रद्धालुओं ने इस मेले का खूब आनंद लिया और उत्सव को एक अलग ही मुकाम पर पहुंचाया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि इसने सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा दिया। इस प्रकार, भागलपुर में रामनवमी के अवसर पर जो कलाकृति तैयार की गई, वह न केवल एक भव्य धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन गई, बल्कि एक विश्व रिकॉर्ड की ओर बढ़ती हुई एक अद्वितीय कृति भी बन गई है।

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