पाश्चात्य प्रभावों को मात देने हेतु विश्व हिंदू परिषद का सशक्त सत्संग आयोजन
पाश्चात्य सभ्यता हमारे देश के ऊपर विचार, संस्कृति और आचरण के स्तर पर जिस प्रकार हावी होती जा रही है, उसे समाप्त कर भारतीय मूल्यों की पुनर्स्थापना हेतु 15 जून, रविवार को विश्व हिंदू परिषद नगर प्रखंड के तत्वावधान में एक साप्ताहिक सत्संग का आयोजन नगर उपाध्यक्ष बृजेंद्र पांडे के आवास, मोहल्ला कानूनगोपुरा दक्षिणी, बहराइच में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य संचालन एवं मार्गदर्शन डॉ. राकेश कुमार दुबे (विभाग अध्यक्ष, पालक – नगर प्रखंड, मातृशक्ति/दुर्गा वाहिनी, विश्व हिंदू परिषद, अवध प्रांत, बहराइच) द्वारा किया गया, जो इस शृंखला के प्रारंभ से ही मार्गदर्शक की भूमिका में हैं।
डॉ. राकेश दुबे ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि समाज की जड़ों में जो सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना निहित है, उसे पुनः सक्रिय करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि यह सत्संग महज़ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक विचार क्रांति है, जो समाज को न केवल संगठित करती है, बल्कि उसे उसकी ऐतिहासिक धरोहर और आत्म-गौरव का बोध भी कराती है।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों, मातृशक्ति प्रतिनिधियों, दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ताओं और स्थानीय श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। आयोजन में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारियों में बृज किशोर शुक्ला (जिला मंत्री), कामेश गुप्ता (जिला सह मंत्री), चंद्रिका प्रसाद गुप्ता (नगर सहमंत्री), सुशील सिंह एडवोकेट (नगर उपाध्यक्ष), शरद कालिया (नगर उपाध्यक्ष), नीरज त्रिपाठी (नगर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख), सदानंद पांडे (श्रीराम जानकी मंदिर प्रबंधक एवं जिला हित चिंतक), श्याम बिहारी पांडे, अमरीश पांडे और किशोर सोनी (जिला हित चिंतक) शामिल रहे।
वार्ड कानूनगोपुरा से देवानंद पांडे (वार्ड अध्यक्ष) और मनोज श्रीवास्तव (उत्तर क्षेत्र अध्यक्ष) ने वार्ड स्तर पर संगठन की गतिविधियों को साझा किया और अपने क्षेत्रों में भावी सत्संगों की योजना पर विचार रखा।

मातृशक्ति की उपस्थिति आयोजन की विशेष पहचान बनी रही। मीना द्विवेदी (जिला सह संयोजिका), संतोष पांडे (जिला सह संयोजिका), शशि दुबे (जिला सत्संग संयोजिका), पुष्पा देवी चौधरी (नगर संयोजिका), माया पांडे (नगर दुर्गा वाहिनी संयोजिका), कुसुम श्रीवास्तव (कानूनगोपुरा उत्तरी संयोजिका), नंदिनी मिश्रा और चंद्रलता पांडे ने संगठन की नारी शक्ति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मातृशक्ति की भूमिका केवल आयोजनों तक सीमित नहीं, बल्कि वह परिवार और समाज के मूल संस्कारों को संभालने वाली आधारशिला है।
सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि आज के युग में बाहरी सांस्कृतिक प्रभावों ने भारतीय जीवनशैली को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास किया है, ऐसे में सत्संग जैसे आयोजनों की उपयोगिता और आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हो गई है। यह केवल धर्म प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि एक मानसिक और सांस्कृतिक स्वच्छता का आंदोलन है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राकेश दुबे ने सभी आगंतुकों और कार्यकर्ताओं को साधुवाद देते हुए कहा कि यह श्रृंखला अब केवल नगर प्रखंड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार के शृंखलाबद्ध आयोजन किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विचारों के शुद्धिकरण के बिना समाज की दिशा नहीं बदली जा सकती और यह कार्य सत्संग ही कर सकता है।
सप्ताहिक सत्संग का यह आयोजन श्रद्धा, एकता और आत्मचिंतन का अद्भुत संगम रहा, जो आने वाले समय के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत हुआ।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की ओर बढ़ता हुआ कदम है — जो भारत की आत्मा को फिर से जगाने का कार्य कर रहा है।
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