April 21, 2026

“अगर नाम बड़ा नहीं, तो काम भी नजरअंदाज?” – एक महिला क्रिकेटर के एक पोस्ट ने बीसीसीआई की चुप्पी को सवालों के घेरे में ला दिया

आईपीएल 2025 के रोमांचक माहौल के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने क्रिकेट जगत में तूफान ला दिया है। यह पोस्ट किसी फैन या आलोचक ने नहीं, बल्कि खुद एक भारतीय महिला क्रिकेटर ने शेयर की है – और निशाने पर है बीसीसीआई। आरोप है “भेदभाव” का, और नाम जुड़ा है भारतीय क्रिकेट के साइलेंट हीरो – मनीष पांडे से।

 

भारतीय महिला क्रिकेटर भारती फुलमाली ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर मनीष पांडे के समर्थन में एक तीखा संदेश लिखा, जिसने बीसीसीआई की निष्पक्षता पर उंगलियां उठा दी हैं। उन्होंने लिखा,

 

> “मनीष पांडे 18 साल से आईपीएल खेल रहे हैं। लेकिन उन्हें बीसीसीआई की ओर से कोई सम्मान नहीं दिया गया, क्योंकि उनके पास पीआर और बड़ा फैनबेस नहीं है। अगर भगवान ने उन्हें एक और मौका दिया होता, तो वो खुद को साबित कर देते।”

 

 

 

इस बयान ने न सिर्फ क्रिकेट फैंस को चौंकाया, बल्कि यह बहस भी छेड़ दी कि क्या वाकई बीसीसीआई खिलाड़ी की लोकप्रियता को प्रदर्शन से ज्यादा तवज्जो देता है?

 

असल में, आईपीएल के 18 साल पूरे होने के मौके पर बीसीसीआई ने एमएस धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे स्टार खिलाड़ियों को सम्मानित किया, जो लीग के पहले सीजन से जुड़े हुए हैं। लेकिन मनीष पांडे, जो इसी लीग का लगातार हिस्सा रहे और 2009 में आईपीएल इतिहास का पहला भारतीय शतक जड़ चुके हैं, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।

 

भारती फुलमाली ने मनीष के 2025 के प्रदर्शन का हवाला भी दिया –

 

बनाम मुंबई इंडियंस: 19 रन (14 गेंद)

 

बनाम चेन्नई सुपर किंग्स: नाबाद 36 रन (28 गेंद)

 

बनाम सनराइजर्स हैदराबाद: 37 रन (23 गेंद)

 

 

> स्ट्राइक रेट: 141.54 | औसत: 46.00

 

 

 

इन आंकड़ों से साफ है कि मनीष पांडे न सिर्फ खेल रहे हैं, बल्कि अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं। तो फिर सम्मान क्यों नहीं मिला? क्या स्टारडम ही सबकुछ है?

 

भारती ने मनीष के खेल को “एक कला का अनुभव” कहा – जो दर्शाता है कि एक सच्चा क्रिकेट प्रेमी पिच पर सिर्फ रन नहीं देखता, बल्कि खेल की आत्मा भी महसूस करता है।

 

इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। लाखों फैंस भारती की इस टिप्पणी से सहमति जता रहे हैं। हालांकि, बीसीसीआई की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है।

 

यह विवाद सिर्फ मनीष पांडे तक सीमित नहीं – यह सवाल है उस सिस्टम का, जहां प्रतिभा से ज्यादा ‘प्रभाव’ मायने रखता है। भारती फुलमाली की यह आवाज़ सिर्फ एक खिलाड़ी के लिए नहीं, बल्कि उन सभी के लिए है, जो मैदान पर पसीना बहाते हैं… मगर शोहरत की रोशनी से दूर रह जाते हैं।

 

अब सवाल बीसीसीआई से है – क्या ‘शांति से खेलने वाले’ खिलाड़ियों की कोई कीमत नहीं?

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