April 18, 2026

बलिया में बीजेपी नेता की गुंडागर्दी, योगी सरकार पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बार-बार यह दावा करती रही है कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित हो चुका है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन बलिया की इस घटना ने इन दावों की पूरी तरह पोल खोल दी है। सत्ता से जुड़े नेता खुद सरकारी दफ्तरों में घुसकर अधिकारियों को पीटते हैं और प्रशासन महज मुकदमा दर्ज करके खानापूर्ति करता दिखता है। सवाल यह है कि आखिर जनता किससे न्याय की उम्मीद रखे? क्या यह वही “गुंडाराज खत्म” वाला उत्तर प्रदेश है, जिसका वादा जनता से किया गया था? बलिया में जो हुआ, उसने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों पर बड़ा तमाचा जड़ा है।

शनिवार दोपहर 12:30 बजे बलिया शहर के सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित अधीक्षण अभियंता के दफ्तर में जो कुछ हुआ, उसने हर किसी को चौंका दिया। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि बीजेपी नेता मुन्ना बहादुर सिंह अपने 20-25 समर्थकों के साथ अचानक दफ्तर में घुसे। बिना कुछ पूछे और बिना किसी औपचारिक बातचीत के उन्होंने अधीक्षण अभियंता लाल सिंह पर जूतों और लात-घूसों से हमला करना शुरू कर दिया। दफ्तर में रखी फाइलें फाड़ डाली गईं, कागजात हवा में उछाले गए और कांच के गिलास तक तोड़ दिए गए। यह हमला केवल एक अफसर पर नहीं था, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र पर था—यह साफ संदेश था कि सत्ता से जुड़े लोग किसी भी संस्था को अपने दबाव में लाने की ताकत रखते हैं।

अधीक्षण अभियंता लाल सिंह का बयान भी उतना ही चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि वे अपने कार्यालय में बैठकर सामान्य तरीके से काम कर रहे थे। तभी अचानक मुन्ना बहादुर और उनके समर्थक दफ्तर में घुस आए और बिना किसी कारण उन्हें जातिसूचक गालियां देने लगे। विरोध करने पर उन पर जूतों और लात-घूसों से हमला किया गया। उनके अनुसार यह हमला जानलेवा था और इस दौरान दफ्तर का माहौल पूरी तरह से दहशत में बदल गया। वहीं, अभियंता का कहना है कि यह केवल उन पर हमला नहीं था, बल्कि उनके पूरे स्टाफ को आतंकित करने का प्रयास था ताकि विभागीय कामकाज बाधित हो और डर का वातावरण बने।

दूसरी ओर, आरोपी बीजेपी नेता मुन्ना बहादुर सिंह ने खुद को पीड़ित बताने की कोशिश की है। उनका दावा है कि वे 17 साल से चली आ रही बिजली समस्या को लेकर अधीक्षण अभियंता से मिलने गए थे। जब उन्होंने धरना-प्रदर्शन करने की बात कही तो अभियंता और कर्मचारियों ने उल्टा उन्हें गालियां दीं और मारपीट की। उनका कहना है कि वे वर्तमान में इलाज करा रहे हैं और बाद में तहरीर देंगे। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जो दृश्य सामने आए हैं, उसमें साफ दिख रहा है कि हमला पहले उनकी ओर से हुआ और अभियंता खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यानी, मुन्ना बहादुर का बयान सच्चाई से मेल नहीं खाता|

पुलिस ने इस मामले में ASP कृपा शंकर के बयान के अनुसार तहरीर पर कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया है। मुन्ना बहादुर सिंह सहित 20 अज्ञात लोगों पर सरकारी कामकाज में बाधा डालने, गाली-गलौज करने और मारपीट करने के आरोप लगे हैं। अब तक दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और बाकी के खिलाफ दबिश दी जा रही है। लेकिन सवाल यही उठता है कि क्या केवल गिरफ्तारी से इस मामले की गंभीरता कम हो जाएगी? क्या सरकार और प्रशासन यह साहस दिखा पाएंगे कि दोषियों को सख्त सजा मिले, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों? या फिर यह मामला भी सत्ता की हनक के आगे दबा दिया जाएगा?

सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो आग की तरह फैल रहा है। लोग गुस्से में सवाल उठा रहे हैं कि जब सत्ता के दबंग नेता खुलेआम दफ्तर में घुसकर अफसरों की पिटाई कर सकते हैं तो आम जनता किस पर भरोसा करे। विपक्षी दलों ने भी योगी सरकार पर हमला बोल दिया है। उनका आरोप है कि बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को खुली छूट दे रही है, जिसकी वजह से प्रदेश में कानून का डर खत्म हो गया है। यह घटना प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की पोल खोलने के लिए काफी है और आने वाले दिनों में यह मामला सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

अब पूरा प्रदेश यह देख रहा है कि इस केस का अंजाम क्या होगा। क्या सरकार अपने नेता को बचाने के लिए मामला कमजोर करेगी या फिर वास्तव में सख्त कार्रवाई कर उदाहरण पेश करेगी? जनता इस पूरे घटनाक्रम को बारीकी से देख रही है क्योंकि यहां सवाल केवल एक अभियंता की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!