May 1, 2026

भारत ने पृथ्वी-2 और अग्नि-1 मिसाइलों का सफल परीक्षण किया, जानिए कितनी घातक हैं ये हथियार

भारत ने 17 जुलाई 2025 को दो स्वदेशी विकसित कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों — पृथ्वी-2 और अग्नि-1 — का सफल परीक्षण किया। ये परीक्षण देश की रणनीतिक ताकत को और मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

कब और कहाँ हुआ परीक्षण?

अग्नि-1 का परीक्षण ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।

पृथ्वी-2 का परीक्षण कुछ समय बाद चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) के लॉन्च पैड-3 से हुआ।
दोनों परीक्षण 17 जुलाई 2025 को किए गए और रक्षा मंत्रालय ने इनके सफल रहने की पुष्टि की।

क्यों किया गया ये परीक्षण?
परीक्षण का उद्देश्य स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (SFC) की ऑपरेशनल तैयारी की पुष्टि करना था। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि ये मिसाइलें युद्धकाल में रणनीतिक रूप से कारगर साबित हो सकें।

पृथ्वी-2 की खासियत:

यह एक सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल है।

मारक क्षमता: 350 किलोमीटर

विकासकर्ता: DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन)

विशेषता: उच्च सटीकता से लक्ष्य भेदने में सक्षम

इसे रणनीतिक ताकत के रूप में भारतीय शस्त्रागार में शामिल किया गया है।

अग्नि-1 की खासियत:

यह भी एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है।

एकल चरणीय मिसाइल प्रणाली है।

विकासकर्ता: DRDO

विशेषता: परिचालन और तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह पूरा किया।

यह अग्नि मिसाइल श्रृंखला की पहली और भरोसेमंद प्रणाली है।

इन परीक्षणों को DRDO की तकनीकी देखरेख में स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड ने अंजाम दिया।

निष्कर्ष:
पृथ्वी-2 और अग्नि-1 के सफल परीक्षण ने भारत की सामरिक क्षमताओं को और पुख्ता कर दिया है। इन दोनों मिसाइलों का परीक्षण न केवल देश की रक्षा तैयारियों को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता और विश्वसनीयता को भी स्थापित करता है।

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