अयोध्या में यूजीसी से जुड़े विवादों के बीच समाज में एकजुटता का संदेश देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद द्वारा ‘मैं भी सनातनी’ मुहिम के तहत सनातन चेतना पदयात्रा का आयोजन किया गया। यह पदयात्रा बाबा बाजार से प्रारंभ होकर कामाख्या माता मंदिर तक निकाली गई, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त जातीय विभाजन और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर एकात्मता का संदेश देना बताया गया।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सनातनी ने कहा कि समाज में जातीय आधार पर बढ़ रही दूरियों को समाप्त करने के लिए एक व्यापक सामाजिक अभियान की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि लोग अपनी पहचान जाति के बजाय ‘सनातनी’ के रूप में स्वीकार करें, तो सामाजिक संघर्ष और विभाजन स्वतः कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग अपने नाम के साथ जाति सूचक शब्दों के स्थान पर ‘सनातनी’ लिखने का संकल्प लें।

पदयात्रा के दौरान उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे अपने व्यक्तिगत और सामाजिक परिचय में जातिगत उपाधियों का प्रयोग छोड़कर स्वयं को सनातनी के रूप में प्रस्तुत करेंगे। संगठन के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों और प्रखंडों में इसी प्रकार की यात्राएं आयोजित करने की योजना बनाई गई है, ताकि यह संदेश जन-जन तक पहुंच सके।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। यात्रा के समापन पर राष्ट्रीय महासचिव मुकेश सनातनी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह अभियान केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस मुहिम का उद्देश्य समाज को जातीय राजनीति से ऊपर उठाकर एक सांस्कृतिक पहचान के सूत्र में बांधना है।
संगठन ने इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी सामाजिक पहल बताते हुए कहा कि आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों में संवाद कार्यक्रम, पदयात्राएं और जनजागरण अभियान चलाए जाएंगे, ताकि समाज में समरसता और समानता का वातावरण स्थापित किया जा सके।
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