कर्नाटक के हसन जिले में एटीएम में नकदी भरने वाली एक निजी कंपनी में 3 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। मासिक ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितताएं मिलने के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने बैंकिंग और कैश मैनेजमेंट सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि एटीएम में पैसे जमा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों ने फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी रकम का दुरुपयोग किया।
पुलिस के अनुसार कंपनी के दो कर्मचारी नंदीश बी.एल. और मधुकुमार एमपी पर 3 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने कुल 18 एटीएम में नकदी जमा करने के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इनमें 11 एटीएम केनरा बैंक, 3 एटीएम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और 1 एटीएम बैंक ऑफ इंडिया का शामिल होना बताया गया है। आरोप है कि इन एटीएम में वास्तविक रूप से पैसा जमा किए बिना ही रिकॉर्ड में एंट्री कर दी गई और रकम का दुरुपयोग कर लिया गया। कंपनी के अधिकारियों को जब कैश बैलेंस और रिकॉर्ड में अंतर मिला तो मामले की जांच शुरू की गई।
मामले का खुलासा 18 और 19 फरवरी को किए गए मासिक ऑडिट के दौरान हुआ, जब खातों में भारी गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद कंपनी के हसन शाखा प्रबंधक ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल हो सकता है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कंपनी के आंतरिक नियंत्रण तंत्र में कहां चूक हुई, जिससे इतनी बड़ी रकम का गबन संभव हो सका।
इससे पहले भी इसी कंपनी से जुड़े वित्तीय घोटाले सामने आ चुके हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुछ महीने पहले करीब 7.11 करोड़ रुपये की लूट का मामला सामने आया था, जब नकदी ले जा रहे वाहन को बदमाशों ने रोककर पैसे लूट लिए थे। इसके अलावा जनवरी में भी कंपनी के कर्मचारियों पर 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के दुरुपयोग का आरोप लगा था। बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने कैश हैंडलिंग सिस्टम और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामले में जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों से जुड़ी दो टीमों को अलग-अलग एटीएम में नकदी जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें से एक टीम लगभग 57 लाख रुपये और दूसरी टीम करीब 80 लाख रुपये लेकर फरार हो गई। जब संबंधित एटीएम में रकम जमा नहीं हुई तो कंपनी अधिकारियों को शक हुआ और विस्तृत जांच शुरू की गई। अब लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद बैंकिंग सुरक्षा, कैश ट्रांसपोर्ट सिस्टम और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग तेज हो गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके।
Share this content:
