भारतीय रुपया एशिया में सबसे कमजोर, मई में 1.27% गिरावट दर्ज
अप्रैल में शानदार प्रदर्शन के बाद मई 2025 में भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बनकर उभरा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया के 11 बड़े देशों में सिर्फ तीन की करेंसी गिरी—भारत, जापान और हॉन्गकॉन्ग। इनमें भारत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें मई में 1.27% की गिरावट दर्ज की गई। रुपया डॉलर के मुकाबले 84.48 से गिरकर 85.57 पर आ गया।
गिरावट के कारण
टैरिफ अनिश्चितताएं, सीमा तनाव और केंद्रीय बैंक द्वारा भविष्य में संभावित मॉनेटरी ढील की उम्मीदों ने रुपए पर दबाव बनाया। इसके अलावा, डॉलर में तेजी और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता की अनिश्चितता भी प्रमुख वजहें रहीं। शिनहान बैंक इंडिया और SS वेल्थस्ट्रीट की रिपोर्टों में बताया गया कि वैश्विक आर्थिक कारकों ने भारतीय करेंसी पर नकारात्मक असर डाला।
अन्य एशियाई करेंसियों की तुलना
जहां भारतीय रुपया फिसला, वहीं ताइवान डॉलर में 6.97%, कोरियन वोन में 3.30%, इंडोनेशियन रुपया में 1.91% और थाईलैंड की करेंसी में 1.79% की मजबूती दर्ज की गई। जापानी येन में 0.53% और हॉन्गकॉन्ग डॉलर में 1.13% की गिरावट रही, लेकिन भारतीय रुपए की गिरावट सबसे ज्यादा थी।
ताज़ा स्थिति
शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले सात पैसे गिरकर 85.55 पर बंद हुआ। बाजार में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और निवेशकों की सतर्कता के कारण यह गिरावट देखी गई। मिराए एसेट शेयरखान के अनुसार, आगे डॉलर-रुपया विनिमय दर 85.30 से 86 के बीच रहने की संभावना है।
भारतीय मुद्रा की यह गिरावट आर्थिक प्रबंधन और वैश्विक कारकों के बीच तालमेल की चुनौती को उजागर करती है।
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