दिल्ली शराब घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को झटका देते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोनों नेताओं के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक और नैतिक जीत बताते हुए जनता के बीच मजबूती से रखने की तैयारी शुरू कर दी है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में राहत मिलने के बाद पार्टी इसे आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया था, जिसके बाद आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं को जांच और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा। इस विवाद का पार्टी की छवि और राजनीतिक स्थिति पर व्यापक असर पड़ा था, यहां तक कि दिल्ली की सत्ता पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला। अब कोर्ट से मिली क्लीनचिट को पार्टी अपने पक्ष में माहौल बनाने के अवसर के रूप में देख रही है। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में केजरीवाल इस फैसले को जनता के बीच प्रमुख मुद्दा बना सकते हैं, जिससे पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस फैसले से सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को ज्यादा नुकसान होने की संभावना कम है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। पंजाब, गुजरात, गोवा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में आम आदमी पार्टी का बढ़ता प्रभाव कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। खासकर पंजाब में, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार पहले से मौजूद है, वहां कांग्रेस को आगामी चुनावों में कड़ी टक्कर मिलने की आशंका है। गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में भी आम आदमी पार्टी के बढ़ते वोट शेयर का सीधा असर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
गुजरात विधानसभा चुनाव के पिछले आंकड़े भी इसी ओर संकेत करते हैं। वर्ष 2017 में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी के उभार ने कांग्रेस के वोट प्रतिशत को प्रभावित किया, जिससे कांग्रेस की सीटों में भारी गिरावट आई। ऐसे में केजरीवाल को मिली कानूनी राहत भविष्य के चुनावी समीकरणों को और बदल सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर आम आदमी पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करती है तो विपक्षी राजनीति में कांग्रेस के लिए चुनौती और बढ़ सकती है।
वहीं इस फैसले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल भी उठाए हैं। पार्टी के कुछ नेताओं ने जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच कथित सांठगांठ के आरोप लगाए हैं, हालांकि पार्टी हाईकमान ने इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है। कुल मिलाकर अदालत के इस फैसले ने न सिर्फ दिल्ली शराब घोटाले मामले को नया मोड़ दिया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरण बनने के संकेत दे दिए हैं, जिसका असर आने वाले चुनावों में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
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