दिवाली के बाद कई शहरों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ गई है और AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स कई स्थानों पर 300 के पार पहुंच गया है। इतना ऊँचा AQI सभी के लिए खतरनाक माना जाता है, लेकिन इसका असर कुछ विशेष समूहों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। बच्चों, बुजुर्गों, प्रेगनेंट महिलाओं और हार्ट या सांस से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों पर इसका प्रभाव तुरंत दिखाई देता है। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए वे अधिक प्रदूषण अंदर लेते हैं। वहीं अस्थमा, सीओपीडी या हार्ट डिजीज वाले लोगों में खांसी, सांस फूलना, थकान और गले में जलन जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं।
डॉ. आकाश चौधरी, मैनेजिंग डायरेक्टर, आकाश हेल्थकेयर अस्पताल, बताते हैं कि जब हवा खतरनाक स्तर पर हो तो सुबह और शाम के समय खुली हवा में एक्सरसाइज करने से बचें। इस दौरान बाहर निकलते समय हमेशा N95 या N99 मास्क पहनें और ट्रैफिक या भीड़भाड़ वाले इलाकों में लंबे समय तक न रुकें। घर लौटने के बाद चेहरा और हाथ अच्छी तरह धोएं और शरीर को डिटॉक्स करने के लिए पर्याप्त पानी पिएं। साथ ही अपने भोजन में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीजें जैसे नींबू, संतरा, अमरूद, टमाटर और हरी सब्जियां शामिल करें। ये प्रदूषण के दुष्प्रभाव से लड़ने में मदद करती हैं।
घर के अंदर भी प्रदूषण से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता। इनडोर एयर पॉल्यूशन भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। घर में हवा को शुद्ध रखने के लिए एलोवेरा, मनी प्लांट और स्नेक प्लांट जैसे पौधे लगाएं। मोमबत्ती, धूप या अगरबत्ती का अधिक उपयोग न करें क्योंकि ये हानिकारक कण छोड़ते हैं। खिड़कियां दिन में तभी खोलें जब बाहर की हवा थोड़ी साफ हो। इसके अलावा एसी और पंखे के फिल्टर नियमित रूप से साफ करें और घर में धूल जमा न होने दें।
अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सीओपीडी के रोगियों को अपने इनहेलर और दवाइयां नियमित रूप से लेने चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज बंद नहीं करना चाहिए। बाहर निकलने से पहले AQI की जांच करें और यदि स्तर बहुत खराब हो तो घर में ही रहें। बाहर जाने पर नाक और मुंह ढककर रखें ताकि प्रदूषक सीधे फेफड़ों में न जाएं। दिन में एक-दो बार भाप लेना या गरारे करना भी फायदेमंद होता है।
त्वचा के मरीजों को प्रदूषण से होने वाली रूखापन और जलन से बचने के लिए रोज़ मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, हृदय रोगियों को यदि सीने में भारीपन, थकान या असामान्य लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस तरह की सावधानी बरतने से हवा की खराब गुणवत्ता के गंभीर दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
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