April 21, 2026

17,600 करोड़ की जबरदस्त वापसी: अनिल अंबानी ने कैसे किया कमबैक, कहां से लाए इतने पैसे?

कभी भारत के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल रहे अनिल अंबानी बीते कुछ सालों से कर्ज और विवादों में घिरे रहे, लेकिन अब उनके दिन फिर से बदलते दिख रहे हैं। उनकी कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार आ रहा है, और निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उन्होंने 17,600 करोड़ रुपये जैसी भारी रकम कैसे जुटाई?

कारोबार में नई जान, बेटे अनमोल का रोल

अनिल अंबानी के बेटे अनमोल अंबानी के बिजनेस में सक्रिय होने के बाद से ग्रुप में नई ऊर्जा आई। रणनीति में बदलाव हुआ और कंपनियों को फिर से खड़ा करने की दिशा में कदम उठाए गए। इसमें सबसे अहम था रिलायंस कैपिटल में जापानी कंपनी निप्पॉन का निवेश, जिसने ग्रुप को कर्ज से उबारने की राह दिखाई।

कहां से आए 17,600 करोड़?

अनिल अंबानी के ग्रुप की दो प्रमुख लिस्टेड कंपनियां — रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर — अभी भी सक्रिय हैं और इन्हीं के ज़रिए ग्रुप ने ये रकम जुटाई। आइए जानें, फंडिंग का पूरा गणित:

4500 करोड़ रुपये जुटाए गए प्रिफरेंशियल इक्विटी इश्यू के जरिए।

7100 करोड़ रुपये आए वरदे पार्टनर्स से, जो विदेशी FCCB (Foreign Currency Convertible Bonds) के तहत निवेशित हुआ।

6000 करोड़ रुपये यानी 3000-3000 करोड़ रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अलग-अलग QIP (Qualified Institutional Placement) के माध्यम से जुटाए।

इस तरह कुल ₹17,600 करोड़ रुपये की पूंजी इकट्ठी कर अनिल अंबानी ने एक बड़े फाइनेंशियल कमबैक की नींव रखी।

अब कहां खड़ा है अंबानी का साम्राज्य?

आज रिलायंस अंबानी ग्रुप की इन दोनों कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹33,000 करोड़ तक पहुंच चुका है। और अब ग्रुप सिर्फ पारंपरिक सेक्टर्स पर ही नहीं, बल्कि ग्रीन एनर्जी और डिफेंस जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर भी फोकस कर रहा है।

रिलायंस पावर की सब्सिडियरी कंपनियों ने हाल ही में देश और विदेश में सोलर प्रोजेक्ट्स और ग्रीन एनर्जी डील्स की हैं।

रिलायंस इंफ्रा ने जर्मन कंपनी रहेनमेटल के साथ डिफेंस सेक्टर में बड़ी डील साइन की है, जिसके तहत भारत को गोला-बारूद की आपूर्ति होगी।

महाराष्ट्र के रत्नागिरी में 1000 एकड़ में एक नई डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की तैयारी की जा रही है।

नतीजा: बदले समीकरण और भविष्य की उड़ान

अनिल अंबानी का यह फाइनेंशियल कमबैक सिर्फ एक कारोबारी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सर्वाइवल स्टोरी है, जिसमें कर्ज के दलदल से उबरकर दोबारा खड़ा होने की मिसाल पेश की गई है। जहां एक दौर में उन्हें दिवालिया घोषित किया जा रहा था, वहीं आज वे फिर से लाखों करोड़ों के निवेश की बात कर रहे हैं।

अब नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह उभरता अंबानी ग्रुप फिर से उस ऊंचाई को छू पाएगा, जो एक वक्त उसका मुकाम हुआ करती थी।

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