April 17, 2026

अमेरिका से भारत में अवैध प्रवासियों की वापसी: कलकत्ता हाई कोर्ट ने बांग्लादेशी दंपति की जमानत याचिका खारिज की

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं, और बड़ी संख्या में भारतीयों समेत अन्य देशों के नागरिकों को स्वदेश भेजा जा रहा है। हाल ही में यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक बांग्लादेशी दंपति की जमानत याचिका खारिज कर दी, जो जाली पासपोर्ट के सहारे भारत में घुसे थे। अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अमेरिका में अवैध प्रवासियों की निर्वासन नीति का भी उल्लेख किया, और भारत में अवैध अप्रवासियों के मुद्दे पर गहरी चिंता जताई।

बांग्लादेशी दंपति की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की बेंच ने बांग्लादेशी दंपति दुलाल सिल और उनकी पत्नी स्वप्ना सिल की जमानत याचिका पर सुनवाई की। इन दंपति को भारतीय सुरक्षा बलों ने जाली पासपोर्ट के साथ भारत में प्रवेश करते हुए पकड़ा था। दंपति ने कोर्ट में कहा था कि वे 2010 में बांग्लादेश से भारत आए थे और पूर्वी बर्दवान में बस गए थे, लेकिन पिछले 13 महीनों से वे जेल में बंद थे।

कोर्ट ने उनके जमानत आवेदन को खारिज करते हुए, भारत में अवैध तरीके से घुसे बांग्लादेशी नागरिकों के दस्तावेजों और नागरिकता के मामलों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

अमेरिका के निर्वासन की ओर इशारा करते हुए जस्टिस बसाक का बयान

सुनवाई के दौरान, जस्टिस देबांगसु बसाक ने अमेरिका में अवैध अप्रवासियों को उनके स्वदेश भेजने की नीति की ओर इशारा करते हुए कहा, “क्या आप नहीं देख रहे कि अमेरिका में अवैध रूप से गए लोगों को भारत वापस भेजा जा रहा है? ऐसे मामलों में अदालत को नागरिकता संबंधी दस्तावेजों की जांच करने की जरूरत है।” कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से नागरिकता के वैध दस्तावेज देने की बात की और कहा कि जब तक यह स्पष्ट नहीं होगा, तब तक जमानत नहीं दी जा सकती।

नकली पासपोर्ट और जाली दस्तावेजों का सवाल

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में यह दावा किया कि उनके मुवक्किलों के पास उचित नागरिकता दस्तावेज हैं, जिनमें आधार कार्ड, मतदाता कार्ड और राशन कार्ड शामिल हैं। वकील ने यह भी बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर भी मिला है। हालांकि इस दलील ने कोर्ट को हैरान कर दिया, क्योंकि बांग्लादेशी दंपति ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने जाली पासपोर्ट के साथ भारत में प्रवेश किया था।

भारतीय दस्तावेजों का मुद्दा और जमानत याचिका का खारिज होना

कोर्ट ने यह कहा कि बांग्लादेश से भारत आए कई नागरिकों के पास भारत के आधार, वोटर और राशन कार्ड होते हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वे वास्तविक भारतीय नागरिक हैं। जस्टिस बसाक ने यह भी पूछा कि क्या वे लोग इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर रहे हैं, जैसा कि कई अन्य बांग्लादेशी करते हैं, जब वे भारत में बस जाते हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जाली दस्तावेजों के आधार पर कोई नागरिकता प्राप्त नहीं कर सकता।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता की मांग

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में यह भी दलील दी कि चूंकि दंपति हिंदू थे और उन्होंने 2010 में भारत में प्रवेश किया था, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) की समयसीमा के तहत आता है, इसलिए उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए। CAA के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोग, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हैं, उन्हें भारत में नागरिकता का अधिकार दिया गया है।

हालांकि, बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और दंपति की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जाली दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता देने का सवाल नहीं उठता, और इस मामले में आगे की जांच की आवश्यकता है।

अवैध प्रवासियों का मामला भारत में बढ़ती चिंता का विषय

इस मामले ने एक बार फिर से भारत में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं को उजागर किया है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के तहत अवैध अप्रवासियों की वापसी के मामले को लेकर भारत में भी इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई जा रही है। भारत में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की संख्या को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं, और इस पर सरकार की तरफ से कई तरह के कदम उठाए गए हैं।

निष्कर्ष

इस पूरे मामले से यह साफ हो जाता है कि भारत में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, नागरिकता और दस्तावेजों के संबंध में कई जटिलताएं हैं, जो भविष्य में इस तरह के मामलों के समाधान को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। कोर्ट ने अपनी ओर से स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उचित जांच और दस्तावेजों की समीक्षा बेहद जरूरी है, ताकि कोई भी अवैध अप्रवासी कानून का उल्लंघन न कर सके।

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